बेटी के जन्म पर जश्न मनाने वाले उडुपी में नहीं किसी एक दल का रुतबा

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में महज एक सप्ताह का समय बचा है. ऐसे में कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस सहित सभी पार्टियां हर एक सीट पर जीत हासिल करने की जद्दोजहद में जुटी हैं. राज्य में कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर जीत हमेशा अप्रत्याशित रही है. इन्हीं में सबसे पहले नाम उडुपी विधानसभा सीट का आता है, जहां किसी एक नेता का सियासी का जादू नहीं चलता.

उडुपी विधानसभा कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में का हिस्सा है. ये ऐसा क्षेत्र हैं, जहां बेटियों के जन्म पर लोगों के बीच जश्न मनाया जाता है. इस सीट पर 2 लाख 3 हजार 804 मतदाता हैं. ये ऐसी सीट है जहां पुरुषों से ज्यादा महिला मतदाता की संख्या है. पुरुषों की संख्या 98 हजार 759 है तो वहीं महिलाओं की संख्या 1 लाख 5 हजार 15 मतदाता है.

उडुपी विधानसभा सीट का सियासी मिजाज ऐसा है, जो अप्रत्याशित नतीजे देते रहा है. यहां के मतदाता ने कभी भी किसी एक नेता पर दांव खेलने के बजाए सभी पार्टियों के उम्मीदवारों को मौका दिया है.

कांग्रेस के प्रमोद माधवराज ने 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 39 हजार 524 मतों के साथ जीत दर्ज किया था. जबकि 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के. रघुपति भट्ट ने 2 हजार 479 वोटों से जीते थे. ऐसे ही 2004 विधानसभा चुनाव में भट्ट ने इस सीट पर कमल खिलाया था.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 में क्षेत्र की सत्ता पर काबिज कांग्रेस विधायक प्रमोद माधवराज एक बार फिर से चुनाव मैदान में हैं. प्रमोद उडुपी के कांग्रेस जिला प्रभारी हैं. प्रमोद की मां मनोरमा माधवराज भी कांग्रेसी नेता थीं, लेकिन 2004 में वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गई थीं.

सिद्धारमैया सरकार में मत्स्य पालन मंत्री प्रमोद माधवराज के हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ संबंधों में खटास की खबरें आई थीं और उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही थी. पर प्रमोद के कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ने के फैसले से सारे अटकलों ने विराम लगा दिया है.

बीजेपी ने दो बार के विधायक के रघुपति भट्ट को एक बार फिर से कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद माधवराज के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है. वे शिवल्ली ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. रघुपति भट्ट ने बीजडेपी सदस्य के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. वह उडुपी नगरपालिका परिषद के लिए चुने गए थे और बाद में वह बीजेपी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष भी रहे. पार्टी ने उन्हें  2004 में पहली बार विधानसभा टिकट दिया गया और उन्होंने लगातार दो बार विधायक बने.

भट्ट का नाम 2013 में सेक्स सीडी की वजह से चर्चा में आया था. बीजेपी के पूर्व विधायक की कथित रूप से यौन गतिविधि में संलिप्त दिखाते हुए एक सीडी सामने आई थी जिसे लेकर काफी बवाल हुआ था.

राज्य में अपनी खोई जमीन तलाशने में जुटी जनता दल (सेक्युलर) ने  उडुपी से बिरथी गंगाधर भण्डारी को चुनाव मैदान में उतारा है. साथ ही शिवसेना ने मधुकर मुडराडी, ऑल इंडिया ने महिला एम्पावरमेंट पार्टी ने वाईएस विश्वनाथ, भारतीय रिपब्लिकन रक्षा ने शेखर हवानजी को अपना उम्मीदवार बनाया है. क्षेत्रीय दलों के अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में अपनी किस्मत आजमां रहे हैं.