बैंक से पैसे निकालने गई महिला की मौत, इलाज के लिए चाहिए थे 17000, मिले केवल 5000

देश भर में पिछले 4 दिनों से ATM से पैसे नहीं निकाल पाने की समस्या अब विकराल रूप लेती जा रही है. इसमें अब लोगों की जान तक जा रही है. केंद्र सरकार ने भले ही दावा किया है कि हालात को सुधारने के लिए देशभर के एटीएम सेंटर पर पैसे पहुंचाए जा रहे हैं मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है.

ताजा घटना में बिहार के पूर्णिया जिले में एक अधेड़ महिला (70) खुद का इलाज करवाने के लिए पिछले 4 दिनों से बैंक का चक्कर लगा रही थी मगर अंत में उसे पैसे नहीं बल्कि मौत मिली.

पूर्णिया के रुपौली प्रखंड की रहने वाली नूरजहां खातून नाम की महिला पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थी और अपना इलाज कराने के लिए वह अपने बेटे के साथ लगातार पूर्णिया शहर आ रही थी. इस बीच सेंट्रल बैंक की शाखा से 17000 रुपये निकालने की कोशिश की मगर पर्याप्त पैसा नहीं होने की वजह से बैंक से पैसा नहीं निकल पाया.

गुरुवार को एक बार फिर नूरजहां खातून अपने बेटे मोहम्मद शब्बू के साथ सेंट्रल बैंक पहुंची और मां को बाहर ही बैठा कर उसका बेटा बैंक मैनेजर से मिलने गया. बेटे ने 17000 रुपये निकालना चाहा मगर बैंक अधिकारियों ने मना कर दिया. बेटे ने मां के बीमार होने का हवाला दिया तो बैंक अधिकारियों का दिल कुछ पसीजा.

मोहम्मद शब्बू सच कह रहा है या झूठ इसकी तस्दीक करने के लिए बैंक के अधिकारी बैंक के बाहर बैठी नूरजहां खातून की हालत को देखने के लिए पहुंचे. नूरजहां की हालत को देखकर जब उन्हें तसल्ली हो गई कि वाकई उनकी तबीयत खराब है तो उन्होंने कुछ मोहम्मद शब्बू को केवल 5000 रुपये देने की बात कही.

मरता क्या न करता, बेटे ने बैंक से 5000 रुपये निकाले और बाहर आकर मां के साथ घर जाने के लिए ऑटो का इंतजार करने लगा मगर उसी वक्त नूरजहां खातून की हालत बिगड़ गई और उसकी वहीं पर मौत हो गई.

इस घटना के बाद स्थानीय लोग काफी आक्रोशित हो गए और उन्होंने बैंक के बाहर हंगामा किया. गुस्साए लोगों ने नूरजहां खातून के शव को लेकर रुपौली-कुर्सेला मुख्य मार्ग को जाम कर दिया.

इस घटना को लेकर जब सेंट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक सुधांशु शेखर से बात की गई तो उन्होंने इस बात से इंकार किया कि नूरजहां खातून पिछले 4 दिनों से अपने पैसे निकालने के लिए बैंक का चक्कर लगा रही थी.