बोट यात्रा-झील किनारे डिनर: चीन दौरे पर वुहान में ये है PM मोदी का कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंच गए हैं. यहां वह चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर वार्ता करेंगे. इसके अलावा कई और कार्यक्रमों में भी शिरकत करेंगे. पीएम मोदी का यह दौरा दोनों देशों की बीच रिश्तों में तनाव और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के मद्देनजर काफी अहम माना जा रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी के साथ पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए वुहान पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया. दोनों नेता हमारे द्विपक्षीय संबंधों के बढ़ने की रणनीतिक और दीर्घकालीन परिप्रेक्ष्य से समीक्षा करेंगे.

ये हैं कार्यक्रम

बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच सीमा विवाद सहित कई मुद्दों का हल करने के लिए आमराय बनाने की दिशा में काम करने की भी उम्मीद है. अधिकारियों ने बताया कि इस अनौपचारिक वार्ता के दौरान किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया जाएगा.

इस दौरान कार्यक्रमों में दोनों प्रमुख नेताओं की अनौपचारिक सीधी बातचीत, चीन के सबसे अच्छे म्यूजियम की यात्रा और एक मनमोहक झील के किनारे रात्रि भोज शामिल है.

‘दिल से जुड़ेगा दिल’

इस सम्मेलन को ‘दिल से दिल को जोड़ने वाली पहल’ करार दिया जा रहा है जिसका उद्देश्य दोनों देशों के कुछ अति विवादास्पद मुद्दों पर सहमति की राह खोजना है. मोदी और शी जिनपिंग आज दिन के भोजन के बाद अकेले में बैठक करेंगे.

दोनों नेता शुरू में हुबई प्रांतीय संग्रहालय जाएंगे जहां बड़ी संख्या में ऐतिहासिक व सांस्कृतिक निशानियां मौजूद हैं.

झील किनारे डिनर

इसके बाद दोनों नेता वार्ता करेंगे जिसमें दोनों ओर से 6-6 आला अधिकारी भाग लेंगे. दोनों नेता चर्चित ईस्ट लेक के किनारे रात्रि भोज करेंगे जो कि चीन के क्रांतिकारी नेता माओ का माओत्से तुंग का पसंदीदा अवकाश गंतव्य रहा है.

शनिवार को दोनों नेता झील के किनारे टहलेंगे, बोट में यात्रा करेंगे और भोज करेंगे.

पहली बार ऐसी मुलाकात

पीएम मोदी के इस दौरे पर कोई समझौता नहीं होगा. अधिकारियों ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन मुद्दों को सुलझाने पर सहमति बनाने का प्रयास है जो कि किसी समझौते की घोषणा के बजाय बाद की कार्रवाई पर होगा. दोनों नेताओं के बीच इस तरह का संवाद पहली बार हो रहा है.

चीनी सेना ने क्या कहा

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर सम्मेलन दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को स्थिर बना सकता है. चीनी सेना के मुताबिक, सीमाओं पर शांति बनाए रखने में मदद कर सकता है और मतभेदों को सुलझा सकता है.

पीएम मोदी की चौथी चीन यात्रा

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी की यह चौथी चीन यात्रा है. इसके बाद वह 9 और 10 जून को क्विंगदाओ शहर में होने जा रहे एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन जा सकते हैं.