भरपेट भूखा

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वंचितों के सपने

विद्रोह की छाती पर अंकुरित होने लगे

अन्याय की धरती भी नहीं रोक सकी

नहीं रोक सकती पैदा होने से

इन सुलगते सपनों को

वादी खामोश है प्रतिवादी ताकतवर

कुंठित चुनौतियां फहरा रही हैं

विजय पताका बनकर

क्यों नहीं मान लेते

जब-जब होगा समर

मनुष्य ही हारेगा।

लड़ाई जारी रहेगी, मरेगी मानवता

भरपेट और भूखे की भेदक खाई और बढ़ेगी।

डॉ. सुधा उपाध्याय…

 


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