भानु श्री सोनी – पति-पत्नी – साप्ताहिक प्रतियोगिता

पवित्र प्रेम से बाँधी जिन्होंने,
अपने जीवन की डोर,
सहगामी है, जीवन पथ के,
एक है चाँद और दूसरा चकोर।
संस्कारों की छाँव में,
अपना कर्तव्य निभाते है,
पति-पत्नी।।

हो जीवन कर्म समाज का,
या हो प्रश्न शास्त्रार्थ का,
चाहे भावनाओं की पवित्र गंगा हो
या क्रम हो धूप और छाँव का,
हर परिस्थिति में एक दूजे का,
साथ निभाते हैं, पति-पत्नी।।

प्रेम की सरल परिभाषा है,
जिनके मन में हर पल,
उज्ज्वल भविष्यकी अभिलाषा हैं
एक-दूजे का प्यार हैं,
एक शब्द, एक आभास है।
एक जीवन का आधार हैं,
दूजा जन्मो का सिंगार है,
कभी राधा, कभी श्याम
बन जाते है, पति-पत्नी।।

बहुत सोच समझकर बाँधी होगी,
ईश्वर ने इनके जीवन की डोरी,
ये रिश्ता चलता है दोनों पहियों पर
तभी खरा उतरता है, उम्मीदों पर
इसलिए ही तो स्वस्थ समाज का
आधार हैं, पति-पत्नी।।