मनित कुमार मीणा – जवान/फौजी/सैनिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

हम महफूज़ रहते है ,
क्योकि वो वीर-जवान-सैनिक सीमा पर चौकसी करते है ।

हम रात भर अमन-चैन की नींद लेते है,
क्योंकि वो वीर -जवान-सैनिक बिना पलक झपके राते गुजार लेते है ।

हिम्मत,जज्बा ऐसा की सियाचिन,हिम ग्लेशियर भी हार मान लेते है ,
जुनून ऐसा की मौत से भी खेल लेते हैं।

हमारे वीर-जवान-सैनिक देश के लिए खुद को कुछ इस तरह से ढाल लेते हैं ।

अगर आये राष्ट्र पर आफ़त तो खुद ही टकरा लेते हैं ।
हंस कर हो जाते है वो देश पर निछावर ,
कुछ इस तरह से भी वो अमर हो जाते है ।

हम चैन से रहते है ,
क्योकि सारी बेचैनियां तो वो खुद पाल लेते हैं ।

हम तो बेख़बर से ,अनजान से रहते है ,
वीर-जवान-सैनिक ही तो है जो इश्क भारत माता से कर लेते हैं ।

वो रखवाले ,पहरेदार सरहद पर खड़े रहते है ,
तब जाकर हम चैन से सो लेते है ।

लेकर भारत माता की रक्षा का प्रण,
वो वीर -जवान-सैनिक क़ुर्बान हो जाते है ।

वो हिमालय, हिम शिखर भी उनके जज्बे को सलाम करते हैं ,
जिनमे उनके रहने के ठिकाने तक नही होते है।

हम हमारे ऐसे वीर-जवान-सैनिकों का दिल की गहराइयों से इस्तक़बाल करते हैं।।।