मुजरिम – पदमा तिवारी दमोह

कहेंगे किस को हम मुजरिम
क्या है इसकी परिभाषा
चोरी आवारगी करने वाले या
बोलते जो गाली गलौच की भाषा।।

नहीं हम सभी हैं गुनहगार
सच को झूठ में बदलते हैं
मिलता है संबल वल्लिष्ठों से
यह गुनाह हम ही तो करते हैं।।

नहीं होता कोई जन्मजात मुजरिम
बढ़ावा हम जैसे ही देते हैं
उनकी मजबूरी और गुनाह हमारे
गिड्डी नोटों की थमाते हैं।

धोखा धड़ी गुनाहों से उनसे
संवेदनाएं हो जाती कोसों दूर
झूठ को बनाते चमकीला
समझते वह अपने को शूर।।

अपने अपने स्वार्थों के बस
मजबूरी का फायदा उठाते हैं
जिंदगी कईयों की होती बर्बाद
कदम पीछे ना हटाते हैं।।

कैद में भी होते हैं जो
जमानत उनकी करवाते हैं
बताओ गुनहगार कौन है
जिसे हम मुजरिम बताते हैं।।
पदमा ओजेंद्र तिवारी दमोह मध्य प्रदेश।

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