मॉनसून सत्र: विपक्ष ही नहीं संसद में सहयोगी भी दे सकते हैं सरकार को चुनौती

संसद के मॉनसूत्र सत्र से पहले एक ओर सरकार लंबित विधेयकों को पारित कराने की मंशा जता चुकी है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है. अर्थव्यवस्था की हालत से लेकर किसानों के हालात, मॉब लिंचिंग, कश्मीर की सियासत, विशेष राज्य का दर्जा जैसे कई अहम मुद्दे हैं जिनकी गूंज 18 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में सुनाई देगी. लेकिन सरकार के सामने चुनौती सिर्फ विपक्ष नहीं बल्कि सहयोगी भी हैं.

टीडीपी ने तोड़ा था नाता

पिछले बजट में अपनी मांगों को लेकर अड़ी टीडीपी ने बीच सत्र के दौरान ही सरकार का साथ छोड़ा था. एनडीए का हिस्सा रही टीडीपी आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा मांग रही थी. साथ ही राज्य के लिए विशेष आर्थिक सहायता भी उसकी प्राथमिकता थी. इस बार टीडीपी तो विपक्ष में खड़ी है लेकिन शिवसेना और जेडीयू जैसे सहयोगी दल सरकार के सामने चुनौती पेश कर सकते हैं. सहयोगी की मांगों को सरकार सिरे से नरजअंदाज भी नहीं कर सकती और विपक्ष की तरह उनपर सीधा हमला भी आसान नहीं होगा.