मोदी-शी मुलाकात के बाद सीमा पर भी पिघली बर्फ, टॉप कमांडर्स को मिलेगी हॉटलाइन!

पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वुहान में मुलाकात के बाद सीमा पर भी रिश्तों की बर्फ पिघलती दिख रही है. पिछले साल डोकलाम के बाद बना तनावपूर्ण माहौल अब ठंडा होने लगा है. भारत-चीन के आला अधि‍कारी अब दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक हॉटलाइन स्थापित करने के लिए सक्रिय हो गए हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर सैन्य कमांडर तत्काल बात कर सकें.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यास की संभावना पर भी विचार शुरू हो गया है.

कुछ वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के मुताबिक पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि अपनी-अपनी सेनाओं को यह ‘सलाह’ दी जाए कि वे शांत रहें और गश्ती के दौरान टकराव से बचें.

एक अधिकारी ने अखबार से कहा कि डोकलाम में भी सैन्य कामकाज में तनाव कम होगा, जो हाल के दिनों तक बना हुआ था. अब बैनर ड्रिल, फ्लैग मीटिंग और सीमा सैन्य कर्मियों की मुलाकात (BPMS) आदि के लिए पर्याप्त तंत्र बनाया जा चुका है.

हालांकि जमीनी स्तर पर उनको प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया है. उदाहरण के लिए दोनों देशों के बीच अक्टूबर, 2013 में किया गया सीमा रक्षा सहयोग समझौता (BDCA) अभी तक पूरी तरह से प्रभावी नहीं हुआ है.

BDCA में कहा गया है कि दोनों पक्ष अपनी सेनाओं को एक-दूसरे के गश्ती इलाके से दूरी बनाने को कहेंगे. लद्दाख से लेकरअरुणाचल प्रदेश तक फैले करीब 4,057 किमी लंबी सीमा नियंत्रण रेखा पर 23 ‘विवादित इलाके’ हैं, जहां अक्सर गश्ती के दौरान आक्रामक तरीके से सैनिक दूसरे के गश्ती इलाके तक पहुंच जाते हैं. इसका नतीजा होता है, दोनों सेनाओं का आमना-सामना. साल 2017 में ऐसी 218 घटनाएं हुई हैं.