मोदी सरकार के 4 साल में क्रूड 31 डॉलर सस्ता, लेकिन पेट्रोल 6 रु महंगा, GST लगा तो 25 रु तक घटेंगे दाम

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नई दिल्ली. मई 2014 में जब भाजपा ने सत्ता संभाली तो ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 80 डॉलर रह गया है। क्रूड की ये स्थिति तब है, जब वह हाल ही के महीनों में महंगा हुआ है, लेकिन फिर भी 2014 के 111 डॉलर/बैरल से 28% नीचे है। 2014 में पेट्रोल 71 रुपए था, जो आज 77 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है। यानी पेट्रोल उस समय की तुलना में 8% महंगा है। अगर सरकार विपक्ष की मांग और नीति आयोग के सुझाव पर अमल करते हुए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाती है तो पेट्रोल 25 रुपए तक सस्ता हो सकता है।

हकीकत : 2014 के बाद दो साल में क्रूड 75% सस्ता हुआ तो पेट्रोल सिर्फ 17% नीचे आया

– मई 2014 के बाद एक मौका ऐसा भी आया जब क्रूड तेजी से सस्ता हुआ। 7 महीने में जनवरी 2015 तक क्रूड 111 से घटकर 46 डॉलर/बैरल तक पहुंच गया। गिरावट का सिलसिला यहीं नहीं थमा। जनवरी 2016 में तो ये 29 डॉलर तक फिसल गया। इस दौरान क्रूड 80% लुढ़का, लेकिन पेट्रोल सिर्फ 17% सस्ता हुआ।

पेट्रोल-डीजल महंगा होने की वजह : एक्साइज ड्यूटी, कंपनियों की कमाई और 46% टैक्स

1) 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ी

– क्रूड सस्ता होने से जितना फायदा जनता को मिलना चाहिए था, उसका एक चौथाई भी नहीं मिला। ऐसा इसलिए, क्योंकि नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के दौरान सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई।

– एक्साइज ड्यूटी से सरकार की कमाई 2013-14 में 88,600 करोड़ रुपए थी। 2016-17 में यह बढ़कर 2.42 लाख करोड़ रुपए हो गई।

4 साल में पेट्रोल पर 105% और डीजल पर 330% बढ़ी एक्साइज ड्यूटी

एक्साइज ड्यूटी 2014 एक्साइज ड्यूटी 2018
पेट्रोल 9.48 रुपए 19.48 रुपए
डीजल 3.56 रुपए 15.33 रुपए

सरकार की 100 रुपए की आमदनी में 19 रुपए पेट्रोल-डीजल से आते हैं

– 2016-17 में केंद्र को पेट्रोलियम पदार्थों पर 2.73 लाख करोड़ रुपए का टैक्स मिला। यह सरकार को टैक्स से हुई कुल आय (19.46 लाख करोड़) का 14% था। केंद्र के कुल एक्साइज रेवेन्यू में 85% हिस्सा और कुल टैक्स रेवेन्यू में 19% हिस्सा पेट्रोल-डीजल का होता है।

2) 4 साल में तेल कंपनियों की कमाई बढ़ी

– 2017-18 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का शुद्ध मुनाफा 21,346 करोड़ रुपए रहा, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। इस दौरान 5.06 लाख करोड़ का टर्नओवर रहा। 2014-15 के 5,272 करोड़ रुपए की तुलना आईओसी का मुनाफा चार गुना से भी ज्यादा बढ़ा। 2018 की मार्च तिमाही में 40% ज्यादा मुनाफा हुआ। रिफायनिंग मार्जिन और इन्वेंट्री यानी पुराने स्टॉक से कंपनी ने फायदा कमाया। शुद्ध मुनाफा 5,218 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में प्रॉफिट 3,720.62 करोड़ था।

– 2018 की मार्च तिमाही में एचपीसीएल का मुनाफा 4% घटा, लेकिन पूरे वित्त वर्ष में 6,357 करोड़ का मुनाफा रहा। ये अब तक का सबसे ज्यादा है। 2014-15 की तुलना में 2017-18 में कंपनी को दोगुने से भी ज्यादा प्रॉफिट हुआ।

3) 77.83 रुपए लीटर पेट्रोल में 46% टैक्स शामिल

तेल कंपनियों ने एक बैरल कच्चा तेल 5903.31 रुपए में खरीदा यानी 37.12 रुपए प्रति लीटर

रिफाइनिंग के बाद डीलर को बेचे गए पेट्रोल की कीमत 38.17 रुपए प्रति लीटर

एक्साइज ड्यूटी: 19.48 रुपए

वैट: 16.55 रुपए

डीलर कमीशन: 3.63 रुपए

आम लोगों को मिलने वाले पेट्रोल का रेट: 77.83 रुपए

(आंकड़े दिल्ली के और 25 मई की स्थिति के मुताबिक)

समाधान : सरकार के पास 5 विकल्प

शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन

1) एक्साइज ड्यूटी में कटौती करें या राज्यों को टैक्स घटाने को कहा जाए। नीति आयोग ने भी कहा है कि राज्य 15 फीसदी तक वैट कम करें। वहीं, विपक्ष केंद्र सरकार से यह मांग कर रहा है कि वह एक्साइज ड्यूटी घटाए।

2) तेल कंपनियों को सरकार कुछ दिन घाटा उठाने के लिए कहे फिर बाद में उसकी भरपाई करे।

लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन

4) अभी जाे पेट्रोल 77.82 रुपए लीटर है, जीएसटी के दायरे में आने पर 52.48 रुपए लीटर हो सकता है

रिफाइनिंग के बाद डीलर को बेचे गए पेट्रोल की कीमत 38.17 रुपए प्रति लीटर

28% का अधिकतम जीएसटी भी लगा तो 10.68

डीलर कमीशन: 3.63 रुपए

आम लोगों को मिलने वाले पेट्रोल का रेट: 52.48 रुपए

यानी मौजूदा 77.82 रुपए लीटर से 25 रुपए कम

5) विंडफॉल टैक्स: पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने के लिए सरकार अगर एक्साइज ड्यूटी घटाती है तो भरपाई के लिए ओएनजीसी और दूसरी कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगा सकती है। यह सेस के रूप में लगेगा। 70 डॉलर प्रति बैरल की सीमा तय हो सकती है। कीमत इससे ऊपर जाने पर अगर कंपनियों को फायदा होता है तो उन्हें मुनाफे पर सेस देना पड़ेगा।


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