राजस्थान: अब लोकसभा चुनाव में गुटबाजी का असर, आधी सीटों पर पसोपेश में कांग्रेस

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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस अब तक उम्मीदवारों की पांच लिस्ट जारी कर चुकी है, लेकिन राजस्थान के एक भी प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं हो पाया है. पिछले दो हफ्तों से लगातार प्रदेश नेताओं की बैठकें चल रही हैं, जिनमें कुल 25 सीटों में से लगभग पचास फीसदी पर नाम तय कर लिए गए हैं, लेकिन बाकी सीटों के प्रत्याशियों पर अभी अंदरूनी घमासान दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के गुटों का असर भी टिकट वितरण में देरी की वजह माना जा रहा है. अजमेर, जयपुर और बाड़मेर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर टकराव ज्यादा है.

दिल्ली में तीन दिनों की बैठक के बाद कांग्रेस में ज्यादातर सीटों पर नाम तय हो गए हैं, लेकिन अजमेर, बाड़मेर-जैसलमेर, जयपुर और भीलवाड़ा जैसी अहम सीटों पर अब भी पेंच फंसा है. अजमेर सीट की बात की जाए तो यहां हुए उपचुनाव में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा जीते थे, अब सचिन पायलट का खेमा चाह रहा है कि अशोक गहलोत के खास बने रघु शर्मा को एक बार फिर अजमेर सीट से ही टिकट दिया जाए. जबकि रघु शर्मा लोकसभा चुनाव लड़ना ही नहीं चाह रहे हैं. उनका कहना है कि यह सीट परंपरागत रूप से उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की सीट रही है, ऐसे में वो ही अपना उम्मीदवार तय करें. इसी तरह दूसरी सीटों पर भी केंद्र और राज्य की राजनीति अहम बिंदु बन गया है.

विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आए मानवेंद्र सिंह बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन राज्य के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी कह रहे हैं कि उन्हें केंद्र की राजनीति करनी है. हालांकि, उनके इस तर्क के पीछे वजह कुछ और बताई जा रही है. सूत्रों का कहना है कि हरीश चौधरी को लगता है कि वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्हें कम महत्व का मंत्री पद दिया गया है, ऐसे में अशोक गहलोत या सचिन पायलट के बजाय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम में रहकर राजनीति करना चाहते हैं.


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