राज्यसभा में 6 साल, सिर्फ सदस्यता बचाते रहे सचिन और रेखा?

सचिन तेंदुलकर और रेखा बतौर राज्य सभा सदस्य अपने कार्यकाल में संसद के आखिरी सत्र में दिखाई दे सकते हैं. बशर्ते क्रिकेट या फिल्म की कोई मजबूरी उनके सामने न हो. ऐसा इसलिए कि अपने 6 साल के कार्यकाल के दौरान दोनों ने संसद के हुए सभी सत्रों में महज एक या दो दिन सदन में मौजूद रहे. यह मौजूदगी इसलिए भी रहे जिससे उनकी राज्यसभा सदस्यता लगातार बनी रहे.

लेकिन जहां तक संसद में किसी सांसद की जिम्मेदारी का सवाल उठता है तो दोनों ने अपने कार्यकाल के दौरान सवाल पूछना, जवाब देना और कानून बनाने के काम को कोई तरजीह नहीं दी. क्या दोनों को जिसलिए 6 साल पहले मनोनीत कर संसद भेजा गया वह मकसद पूरा हुआ?

राज्यसभा में बतौर सदस्य रेखा के 6 साल

राज्यसभा वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों को देखें तो 6 साल के कार्यकाल के दौरान रेखा ने एक भी सवाल नहीं पूछा. जाहिर है जब सवाल नहीं पूछा तो केन्द्र सरकार द्वारा उनसे कोई संवाद नहीं किया गया. जब कोई सांसद सदन में सवाल पूछता है तो उसका जवाब केन्द्र सरकार द्वारा दिया जाता है और उस सवाल-जवाब को संसद के रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है और साथ ही उसे राज्यसभा की वेबसाइट पर अपडेट कर दिया जाता है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि संसद की तरफ से रेखा को सदन के कामकाज में शामिल करने की कोई पहल नहीं की गई. रेखा को सितंबर 2016 से फूड, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन की समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया. इस समिति में रेखा के किसी तरह के योगदान का ब्यौरा संसद के पास नहीं है, जाहिर है यहां भी उन्होंने कुछ भी कहने-सुनने की जरूरत नहीं समझी.

फिल्मी दुनिया में रेखा हमेशा सुर्खियों में रहीं. लेकिन राज्यसभा के उनके कार्यकाल के दौरान कभी संसद में उनके नाम का जिक्र भी नहीं किया गया. जिक्र होता भी क्यों जब उन्होंने कभी भी सांसद की भूमिका में कुछ करने की कोशिश ही नहीं की. संसद में सवाल पूछने के अलावा सांसद द्वारा कोई बिल लाना उसकी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है. लेकिन रेखा ने अपने पूरे कार्यकाल में एक भी बिल संसद में पेश नहीं किया.

अब अंत में रेखा की सदन में मौजूदगी का आंकड़ा बता रहा है कि सभी मनोनीत सदस्यों में उनकी अटेंडेंस सबसे खराब रही है. उनके कार्यकाल में अगस्त 2017 तक हुए संसद के कुल 373 सिटिंग्स में वह 18 सिटिंग्स में शामिल रहीं. यानी पूरे कार्यकाल के दौरान उनकी कुल अटेंडेंस महज 5 फीसदी रही. रेखा ने सिर्फ एक बार सदन के सत्र में शामिल न होने के लिए एप्लीकेशन दी और न शामिल हो पाने की वजह फिल्म में काम करने की मजबूरी बताई. हालांकि कुछ सत्रों से वह बिना एप्लीकेशन दिए गायब रहीं.

हालांकि रेखा ने अपने कार्यकाल के दौरान इतनी सावधानी बरती कि उनकी सदस्यता पूरे कार्यकाल तक बनी रही. संसद के नियम के मुताबिक यदि कोई सांसद संसद के कामकाज से लगातार 60 दिनों तक बिना सूचना गायब रहता है को उसकी सदस्यता खत्म किए जाने का प्रावधान है. लेकिन रेखा की अटेंडेंस कभी भी 60 दिन के इस नियम के खिलाफ नहीं गई और उन्हें पूरे कार्यकाल तक सांसद की सुविधाएं मिलती रही.