रेणु बाला धार– जन्म मृत्यु – साप्ताहिक प्रतियोगिता

जन्म और मृत्यु इक नदी का दो किनारा है , बीच में बहता जीवन वक्त की धारा है . जन्म और मृत्यु देकर खुदा ने दुनिया में उतारा है, हर प्राणी के प्राणका हिसाब रख प्रकृति को संवारा है. जन्म और मृत्यु कभी मिल नहीं सकते , संग संग दोनों कभी खिल नहीं सकते . समय से पहले ये कभी हिल नहीं सकते , दिल और दिमाग हो कभी शामिल नहीं सकते.. दोनों का जीवन से रहता है अनोखा रिश्ता , एक से होती है शुरूआत दूजा से समाप्त किस्सा .. जनम हुआ है तो मृत्यु निश्चित, पर होगा कब,ये बातअनिश्चित होते ही जन्म, मिलजाए खुशी हो जाए मौत, छीनजाए खुशी. लेकर जन्म इस दुनिया में जीवन को चलते जाना है , है मौत जहां वहां सफर रूके ना जाने कौन सा ठिकाना है. जान को इक दिन जाना है मौत को इक दिन आना है , अकेला ही आना जाना है किसी ने नहीं पहुंचाना है . रहना नहीं देश वीराना है, पिंजड़ा तोड़ उड़ जाना है . है जबतक सांस तबतक. आस जगाना है . जन्म और मृत्यु तो बस इक बहाना है …