रेहाना अली – नारी/महिला – साप्ताहिक प्रतियोगिता

औरत तेरा यह किरदार कभी गजब है कभी है प्यार।

कभी तू ममता की देवी है कभी तू शोला और अंगार ।।

तुझ को हल्का कैसे जाने तू है कौम की एक मेमार ।

औरत तेरा यह किरदार कभी गजब है कभी है प्यार ।।

वक़्त ने ऐसी चाल चली है फस गई उसमें प्यारी तू ।

धोखे से यह दिल भी तोड़ा मुश्किल में है नारी तू ।

हिम्मत करके बाहर आ जा डट जा बनके एक कहसार।

औरत तेरा यह किरदार कभी गजब है कभी है प्यार।।

बाहें खोले हुए खड़ी है तुझको पाने वाली है।

बाहर आ के देख जरा यह दुनिया खूब निराली है।

रंजो अलम सब फूट पड़ा है छोड़ गए हैं सब गम खार।

औरत तेरा यह किरदार कभी गजब है कभी है प्यार।।

मिट गई तेरी हर कड़वाहट खुशियां है अब सब दरकार ।

रुखसत हो गए सारे मंजर उम्मीदों की है भरमार।

नई नवेली चाहत लेकर पढ़ती रहना यह अशआर।

औरत तेरा यह किरदार कभी गजब है कभी है