विनोद खन्ना की मां ने रखी थी ये शर्त, बॉलीवुड में विलेन से की थी एंट्री.. जानें 10 खास बातें

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नई दिल्ली: बॉलीवुड में स्टार होते हैं, सुपरस्टार होते हैं, और सभी का युग भी होता है, लेकिन बात अगर बॉलीवुड के हैंडसम हंक यानी विनोद खन्ना की बात करें तो वह एक ऐसे सितारे थे, जिन्‍हें कभी सुपरस्टार नहीं पुकारा गया, लेकिन उनके फिल्मों में आने के बाद कोई भी सुपरस्टार ऐसा नहीं रहा, जिसकी कामयाबी में विनोद खन्ना का योगदान न रहा हो. ‘मुकद्दर का सिकंदर’ को अमिताभ बच्चन की फिल्म के रूप में सभी याद करते हैं, लेकिन क्या आप ‘वकील साहब’ और उनकी दोस्ती के बिना ‘सिकंदर’ के दर्शकों के मन की गहराइयों में उतर जाने की कल्पना कर सकते हैं. ऐसा ही अंदाज सुपरहिट फिल्‍म ‘अमर अकबर एंथनी’ के अमर भी थे. आज विनोद खन्ना की पुण्यतिथि है. विनोद खन्‍ना का जन्‍म 6 अक्‍टूबर, 1946 में पाकिस्‍तान के पेशावर में हुआ था.

विनोद खन्ना से जुड़ी ये 10 खास बातें

– विनोद खन्‍ना की मां ने एक शर्त के साथ विनोद खन्‍ना को बॉलीवुड में प्रवेश की आज्ञा दी. शर्त ये थी कि फिल्‍म लाइन में दो साल के अंदर सफल नहीं हुए तो व्‍यवसाय संभालना होगा.

– फिल्‍मों में एक विलेन के रूप में करियर शुरू करने वाले विनोद खन्ना ने अपने करियर में लगभग 150 से ज्‍यादा फिल्‍में की.

– 1968 में फिल्‍म ‘मन का मीत’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले विनोद खन्ना जब करियर में सुपरहिट हो चुके थे, तभी इस सितारे ने अचानक अध्‍यात्‍म का रुख कर लिया.

– 1987 से 1994 में विनोद खन्ना बॉलीवुड के सबसे मंहगे सितारों में से एक थे. उस समय वह दूसरे हाइयेस्ट पेड ऐक्टर थे.

– ‘मेरे अपने’ के ‘छेनू’ यानी शत्रुघ्न सिन्हा के सामने ‘श्याम’ के रूप में खड़े विनोद खन्ना भुलाए नहीं भूलते, और इसी तरह ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘कच्चे धागे’, ‘बंटवारा’, ‘क्षत्रिय’ में निभाए उनके किरदार भी हमेशा याद रहने वाले हैं.

– देश के सबसे खूबसूरत और ‘रीयल माचो’ स्टार कहे जाने वाले इस ‘पंजाबी मर्द’ ने इन शानदार फिल्मों के अलावा ‘हेराफेरी’, ‘परवरिश’ और ‘खून पसीना’ में अमिताभ बच्चन के साथ, ‘कुर्बानी’ और ‘दयावान’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में फिरोज़ खान के साथ, ‘चांदनी’ में ऋषि कपूर के साथ और ‘द बर्निंग ट्रेन’ में अपने समय के कई स्टारों के साथ काम किया, लेकिन हर फिल्म में उनके किरदार किसी से भी किसी कदर कमतर नहीं थे, और आज तक याद हैं…

– वर्ष 1971 में विवाह, और फिर दो पुत्रों का पिता बन जाने के बाद 1975 में आचार्य रजनीश की ‘शरण’ में चले गए थे.

– लगभग 10 साल बाद विनोद खन्ना ने बॉलीवुड में वापसी की और दूसरी शादी कविता से की. उनकी पहली पत्नी का नाम गीतांजली था.

– संयासी बनने के बाद वापस आने पर राजनीति में प्रवेश करने के साथ फिल्मों में भी काम का सिलसिला जारी रखा और उनकी फिल्म ‘हाथ की सफाई’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था.

टिप्पणियां

– विनोद खन्ना को साल 1999 में फिल्मफेयर की ओर से लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड मिला. सच है कि अगर पुरस्कारों की बात करें, तो उनके काम को वैसी सराहना कभी नहीं मिली, जिसके वह हकदार थे, लेकिन उनके बिना किसी सुपरस्टार का स्टारडम वास्तव में सुपरस्टारडम बन पाता, इसमें संदेह है…


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