शोपियां फायरिंग: 24 अप्रैल तक आर्मी मेजर की जांच नहीं- SC, महबूबा सरकार बोली- आरोपी नहीं है आदित्य

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शोपियां फायरिंग मामले में सोमवार को कहा कि अगली सुनवाई तक मेजर आदित्य के खिलाफ जांच शुरू नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 24 अप्रैल तय की है। शोपियां फायरिंग मामले में आर्मी ने पत्थरबाजों के खिलाफ काउंटर FIR दर्ज की थी। इससे पहले पुलिस ने आर्मी के मेजर और उसकी यूनिट के खिलाफ केस दर्ज किया था। 9 फरवरी को मेजर आदित्य के पिता ले. कर्नल करमवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने पिटीशन दायर की थी।

 

 

जम्मू-कश्मीर सरकार का यू टर्न

– इस मामले में जम्मू कश्मीर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मेजर आदित्य का नाम आरोपियों की लिस्ट में शामिल नहीं है।

कब और कहां हुई थी फायरिंग?
– अफसरों के मुताबिक, 27 जनवरी को आर्मी का एक काफिला शोपियां के गनोवपोरा गांव से गुजर रहा था। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने काफिले पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। जवाब में सिक्युरिटी फोर्सेज ने उन्हें भगाने के लिए कुछ राउंड फायरिंग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

आर्मी ने कहा- मेजर घटनास्थल से 200 मीटर दूर थे
– आर्मी की ओर से कहा गया था कि गढ़वाल यूनिट के जिस मेजर के खिलाफ पुलिस ने हत्या और हत्या की कोशिश के आरोप में केस दर्ज किया था, वो घटनास्थल से करीब 200 मीटर की दूरी पर थे।
– इसके बाद शोपियां फायरिंग मामले में आर्मी ने पत्थरबाजों के खिलाफ काउंटर FIR दर्ज की।

बदले की भावना से FIR में नाम जोड़ा
– लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने कहा, ”10 गढ़वाल राइफल्स के मेजर आदित्य का नाम एफआईआर में बदले की भावना से जोड़ा गया। आर्मी का एक काफिला शोपियां में अपनी ड्यूटी के लिए निकला था। जो बाद में पत्थरबाजों की उग्र भीड़ के बीच घिर गया, पथराव में आर्मी के व्हीकल को भी नुकसान पहुंचा।”
– मेजर आदित्य के पिता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर पिटीशन में कहा गया है कि बेटा आर्मी के अपने साथियों को तनाव वाले इलाके से निकालने के लिए गया था। इस दौरान सिर्फ आर्मी जवानों को रास्ता दिलाने के लिए फायर किए गए। पत्थरबाजों से कई बार आर्मी को नुकसान नहीं पहुंचाने की गुजारिश की, लेकिन वो नहीं माने। इसके बाद वहीं से हटने और रास्ते देने के लिए वॉर्निंग दी गई।