श्रद्धांजली – जवान/फौजी/सैनिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

काश! शहादत के रंगों से,
मैं तस्वीर बना पाती l
ग़म के ताने बाने लेकर,
ग़ज़ल दर्द की कह पाती ll
काश!………………..
माँ दिन रात तड़पती थी,
जब चोट ज़रा सी लगती थीl
पाकर उसके जिस्म के टुकड़े,
क्यों ? पागल न हो जाती ll
काश!……………………
चीख़ रही बेवा की कुमकुम,
बाप लरज़ता बैठा गुम-सुम l
अपनी ख़ुशियाँ उनको देकर,
गठरी ग़म की ले पाती ll
काश!……………………
वर्दी क्यों लहु-लुहान हुई,
दुनिया उनकी वीरान हुई l
उनकी अाँखों के आँसू लेकर
हँसी लबों को दे पाती ll
काश!…………………
माथे पर सिंदूर है अब भी ,
रस्ता देख रही हैं सब ही l
दिये बुझे हैं जिनके घर के,
रौशन उनके दिल कर पाती ll
काश!………………….
हर साल ऱाखियाँ रोयेंगी,
रोली अश्क़ों से धोयेंगी l
हाय! कलाई अपनी देकर,
जगह भाई की भर पाती ll
काश!………………..
दिल छोटे भाई का टूटा है,
बचपन का साथी छूटा है l
कोई तसल्ली उसको देकर,
जोश रगों में भर पाती ll
काश!……………….
जान भी सस्ती होती है,
जब वतन परस्ती होती है l
अपने ख़ून का क़तरा-क़तरा,
फिदा देश पर कर पाती ll
काश!………………..
काश! शहादत के रंगों से,
मैं तस्वीर बना पाती l
ग़म के ताने बाने लेकर,
ग़ज़ल दर्द की कह पाती ll