सत्येन्द्र शर्मा – गणतंत्र दिवस, संविधान– साप्ताहिक प्रतियोगिता

एक बार फिर राजपथ पर तिरंगा हम फहरा रहे हैं,
71 वां गणतन्त्र दिवस हर्षोल्लास से भारतीय मना रहे हैं।
ब्राजील के राष्ट्रपति जेअर बोल्सोनारो मुख्य अतिथि बनकर आ रहे हैं,
स्वतन्त्र भारत के संविधान में आनन्दोत्सव हम सब मना रहे हैं।

स्वयं के संविधान की खुशी को हमने 26 जनवरी को पाया था,
प्रथम बार हमने 26 जनवरी 1950 को गणतन्त्र दिवस मनाया था।
डा0 राजेन्द्र प्रसाद ने पहले गणतन्त्र पर तिरंगा फहराया था,
भारतमाता की जमीं पर स्वानुशासन का सन्देश लहराया था।

इंडोनेशियन राष्ट्रपति सुकर्णो तब आमन्त्रित थे मुख्य अतिथि के रूप में,
हमारे संग गौरवान्वित हुए थे वे भी देखकर भारत को नए स्वरूप में।
दिवाकर की प्रथम किरणों ने भी जयहिन्द कहा था तेजी से चमककर,
हर भारतीय का दिल चहक-महक रहा था भारत के नए प्रारूप में।

बसन्त भी मुस्कराकर स्वागत करता है भारत के संविधान का,
गणतन्त्र दिवस पर्व है भारत के हर नागरिक के स्वाभिमान का।
स्वर्ग जैसी जमीं बन जाये देश मेरा संविधान की राह पर चलकर,
जिम्मेदारी है हम सबकी ध्यान रखें गणतन्त्र के सम्मान का।

संविधान का मूल मन्त्र किस-किसको याद है आओ विचार करें,
शहीदों के सपने सच में उतरे हैं क्या धरातल पर आओ विचार करें।
हम भारत के लोग कितने समर्पित हैं गणतन्त्र के प्रति आओ विचार करें,
संविधान का सन्देश कितना समाया है हमारे मन में आओ विचार करें।

विचार, अभिव्यक्ति, उपासना की स्वतन्त्रता का हम सदुपयोग करें,
सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय के उद्देश्य को हम पूर्ण करें।
बढे़ राष्ट्र की गरिमा, बनी रहे अखंडता, अक्षुण्ता हम सदा ऐसे प्रयोग करें,
बंधुत्व की भावना का निश्चय धारण कर गणतन्त्र दिवस को सार्थक करें।