सत्येन्द्र शर्मा – जवान/फौजी/सैनिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

आंसू मत बहाना मत करना तुम क्रन्दन
सैल्यूट देकर शहादत का करना तुम वन्दन

खून मेरा तब तक शर्मिन्दा होता रहेगा
जब तक तुम्हारा खून पानी बना रहेगा
व्यर्थ है दिल का जोश और हुंकारे बदले की
जब तक आती रहेंगी खबरें यूं ही शहादत की
बेमानी है तुम्हारा दिखावे का साहसिक मंचन
छोड़ो करना केवल बातों में महिमामंडन
गर हक अदा करना चाहते हो मेरे खून का
तो बदला लेकर दिखा दो मेरे खोये वजूद का
आंसू मत बहाना मत करना तुम क्रन्दन
सैल्यूट देकर शहादत का करना तुम वन्दन

मैं तो खुश हूं कि माटी के काम आया
गर्व है कि शहीदों में मेरा भी नाम आया
पीड़ा तो यह है बच्चों से छिन गया साया
बूढे़ मां-बाप की अंखियों में घिर गया अंधियारा
पत्नी न जाने कब तक सूनी राह तकेगी
बहन राखी हाथ में लिए कब तक खड़ी रहेगी
हाल मालूम है मुझसे पहले शहीदों के परिवारों का
रवैया देखा है मैंने व्यवस्था के कर्णधारों का
आंसू मत बहाना मत करना तुम क्रन्दन
सैल्यूट देकर शहादत का करना तुम वन्दन

शहीद के खून की बूंदों का कोई मोल नहीं होता
इस दुनिया में शहादत का कोई तोल नहीं होता
जिन्हें छोड़ गया हूं अपने पीछे उनकी फिक्र होती है
लम्बी जीवन राह पर उनके कष्टों की अनुभूति होती है
कहना है बस यही व्यवस्था से मान मेरा रखना
जीवन संग्राम में मेरे अपनों का ख्याल रखना
चाह यही बस मेरे अपने मेरे बगैर जीना सीख जाये
हाथ न फैले उनका कभी यही व्यवस्था से मिल जाये
आंसू मत बहाना मत करना तुम क्रन्दन
सैल्यूट देकर शहादत का करना तुम वन्दन

आक्रोश जताने से एतराज नहीं मुझको
पर जीते-जी भी तो सम्मान मिले सैनिक को
कोई सैनिक जब घर से सरहद पर जाता है
तब कौन उसे विदा करने के लिए आता है
अच्छा लगता है सरहद पर देशभक्ति की छांव में
पर कब आयेगी सड़कें-बिजली सैनिक के गांव में
शहादत पर खून खौलता है तुम्हारा कद्र करता हूं
जीते-जी भी सम्मान दो सैनिक को निवेदन करता हूं
आंसू मत बहाना मत करना तुम क्रन्दन
सैल्यूट देकर शहादत का करना तुम वन्दन