सत्येन्द्र शर्मा ‘तरंग’ – बाल दिवस – साप्ताहिक प्रतियोगिता

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नन्हे-मुन्नों की मुस्कान सलामत रहे,
बाल दिवस पर दुआ यही करता हूँ ।
हर बचपन का नटखटपन सलामत रहे,
बाल दिवस पर दुआ यही करता हूँ।।

कच्ची मिट्टी समान है हर बच्चा,
सच्चे साँचे का इनको आकार मिले।
खिलती कली समान है हर बच्चा,
एक बचपन में पुष्प हजार खिलें।।

ना मुरझाएं समय से पहले कोई पुष्प,
हृदय में अभिलाषा यही रखता हूँ।
महके जग में सुगन्ध हर बच्चे की
बाल दिवस पर दुआ यही करता हूँ।।

शोषण की काली छाया से दूर रहे हर बच्चा,
शिक्षा, स्वास्थ्य का हर बच्चे को अधिकार मिले।
जीवन्त ताजगी से परिपूर्ण हो हर बच्चा,
सूरज सा तेज और चन्दा सा शीतल व्यवहार मिले।।

मौलिक जरुरतों का अधिकारी है हर बचपन,
न्याय का अधिकार मिले यही कामना करता हूँ।
कभी न जाये मासूमियत किसी बच्चे की,
बाल दिवस पर दुआ यही करता हूँ।।

नन्हें मुन्हों की खिलखिलाहट सलामत रहे,
बाल दिवस पर दुआ यही करता हूँ।
हर बालक की बाल-हठ सलामत रहे,
बाल दिवस पर दुआ यही करता हूँ ।।


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