सबमरीन बनाने में मदद करेगा रूस, भारतीय नेवी को दिया प्रपोजल!

भारतीय नेवी ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसके तहत नई टेक्नोलॉजी की सबमरीन बनाने की तैयारियां जारी हैं. ऐसे में रूस ने भारत के सामने एक पेशकश की है, जिसके तहत वह ज्वाइंट सबमरीन का डिजाइन और कंस्ट्रक्शन करना चाहता है. रूस का कहना है कि इसके तहत वह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी करेगा.

अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, दोनों देश के बीच सोची समिट के दौरान इसको लेकर मई में बात भी हुई थी. जिस दौरान करीब 10 बिलियन डॉलर की 6 नई डीज़ल इलेक्ट्रॉनिक सबमरीन की चर्चा हुई, जिसके भारत को जरूरत भी है. ये सबमरीन Air Independent Propulsion (AIP) सिस्टम के तहत अंडरवाटर काम आती हैं.

सबसे बड़ी बात यह है कि रूस टेक्नोलॉजी, डिजाइन के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन के लिए राजी है. बताया जा रहा है कि सबमरीन का नंबर अभी और भी बढ़ सकता है.

हालांकि, अभी इस प्लान को लागू करने के लिए अभी पुरानी नीति पर चलने की कोशिश की जा रही है. यानी अभी रूस, फ्रांस, जर्मनी और स्वीडन की तरफ से आधिकारिक प्रपोज़ल का इंतजार किया जाएगा. आपको बता दें कि इसी प्रोजेक्ट के तहत भारत को उसकी पहले न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन INS अरिहंत मिली थी. इसे भी रूस के द्वारा विशाखापट्टनम में बनाया गया था.

खबर के अनुसार, सबमरीन का डिजाइन और टेक्नोलॉजी का खर्च करीब 200 मिलियन डॉलर तक का होगा, जिससे भारतीय नेवी का कई पैसा बचेगा और उसे नई जेनरेशन की सबमरीन मिल रही है. बताया जा रहा है कि 10 बिलियन डॉलर की इस डील को पक्का करने के लिए पहले इसका 20 फीसदी पैसा देना होगा. जिसके बाद बात आगे बढ़ सकेगी.

इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कुछ टेक्नोलॉजी भारत में पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी है, लेकिन इसके निर्माण के लिए कुछ तकनीकी चीज़ें हैं जिसका ध्यान देना जरूरी है. इस सबमरीन से जुड़े कई पार्ट्स अभी भी भारत में बनते हैं.