सीमा पर से जल्दी आना। ईद मुबारक!

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सीमा पर से जल्दी आना। ईद मुबारक! ईद मुबारक! अम्मा बोली जब भी आना भारत माँ का नक्शा लाना कभी न अपनी नाक कटाना माँ का कभी न दूध लजाना सर किसी का काट ले जाना कायरता का घटिया बाना पाक सैनिकों की करामात भले जगाती है ज़ज़्बात छाती पर ही लगा निशाना तुम वीरों का धर्म निभाना कभी न माँ का शीश झुकाना क्या वीरों का यही धरम यही बहादुरी का उपक्रम बेटा ऐसा कभी न करना इस जीने से बेहतर मरना जग में वीर वही कहलाए जो सीने पर गोली खाए वह भी कायर औ हत्यारा जिसने पीठ पे गोली मारा ऐसा करके कभी न आना जिससे माँ को पड़े लजाना फिर होगा क्या जीके करना कायर जैसे पल-पल मरना अपने सैनिक की करनी से कहो पाक क्या पाया उलटे ,कर्म घिनौने करके माँ का दूध लजाया युद्ध क्षेत्र को बना हरम भुला दिए सब नियम-धरम कर-कर के नापाक करम ईद के दिन पर मने मुहर्रम किसी वीर का नहीं धरम। ऐसा प्रेम निभाया जाए मातम की नौबत ना आए वह दिन भी हो हमें मुफ़ीद दोनों ओर मने जब ईद ! –डॉ ॰गुणशेखर

 


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