सुकमा हमलाः बीजापुर के जंगलों में बनी रणनीति, 100 से ज्यादा नक्सलियों ने दिया अंजाम

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छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए हमले को 100 से ज्यादा नक्सलियों ने अंजाम दिया है. नक्सलियों ने अपनी रणनीति को अंजाम देने के लिए किस्तराम और पलोदी के बीच सड़क को टारगेट बनाया था. इस काम में 100 से ज्यादा नक्सली लगे थे.

हमले का शिकार बने सुरक्षा बल के जवानों का काफिला किस्तराम से पलोदी जा रहा था, जोकि रोड पर पूर्व दिशा की ओर चल रहा था, हालांकि नक्सलियों को इसकी उम्मीद नहीं थी.

बीजापुर के जंगलों में हुई थी नक्सलियों की बड़ी मीटिंग

नक्सलियों ने इस हमले को अंजाम देने के लिए बीजापुर के जंगलों में एक बड़ी मीटिंग की थी और इस मीटिंग में नक्सली कमांडर हिडमा और पुलारी प्रसाद के साथ 200 नक्सली शामिल हुए थे.

यूनिफॉर्म में थे हमलावर नक्सली

हमले को अंजाम देने वाले सभी नक्सली यूनिफॉर्म में थे. सुरक्षा बलों ने पहले समझा कि ये सभी सीआरपीएफ की अन्य बटालियन के ही साथी हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता लगा कि ये सब नक्सली हैं, इनमें से कुछ काले रंगे की डांगरी पहने हुए थे.

हमले को देखते हुए सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की पार्टी पर यूबीजीएल (अंडरबैरल ग्रेनेड लॉन्चर) से फायर किया, लेकिन इनमें से तीन यूबीजीएल में विस्फोट ही नहीं हुआ. अगर इसमें विस्फोट हो जाता, तो इलाके में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिल जाती.

बहरहाल कोबरा पार्टी ने शानदार बहादुरी दिखाते हुए नक्सलियों को 300 मीटर तक दौड़ाया और फायर किया. सुरक्षा बलों ने नक्सलियों से पिट्ठू, पेट्रोल बम और टिफिन बरामद किए. बाद में सुरक्षा बलों ने चाइनीज रेडियो पर सुना कि नक्सलियों का एक साथी इस हमले में मारा गया है, जबकि 5 घायल हुए हैं. सुरक्षा बल के बाकी जवान पलोदी कैंप में सुरक्षित हैं.

और बड़े हमले कर सकते हैं नक्सली

आजतक के पास मौजूद खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी और मार्च के महीने में नक्सली सुरक्षा बलों पर बड़े हमले कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक नक्सली TCOC यानि टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन के दौरान कर हमले सकते हैं.

पिछले साल भी सुकमा इलाके में ही सबसे बड़ा नक्सली हमला हुआ था. इसमें करीब 25 जवान शहीद हुए थे. ये हमला 24 अप्रैल, 2017 को सुबह के समय ही किया गया था.


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