सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी के तर्क से कोई इनकार नहीं कर सकता

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भारत की यात्रा पर आए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक विशेष साक्षात्कार में वैश्विक सरोकार के मुद्दों पर इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा के साथ खुलकर चर्चा की. उस बातचीत के प्रमुख अंशः

मुझे एक नकारात्मक नोट के साथ इस बातचीत को शुरू करने की अनुमति दें. भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि संयुक्त राष्ट्र, राष्ट्र संघ बनने की ओर अग्रसर है—यह निष्क्रिय हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

मैं नहीं कहूंगा कि यह निष्क्रिय हो रहा है लेकिन यह सच है कि हमें एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. हम एक ऐसे दौर में हैं जहां समस्याएं वैश्विक स्तर की हैं लेकिन साथ ही हमें बहुपक्षीय समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है. आज, देशों को ले लीजिए, सार्वजनिक राय को देख लीजिए. लोगों की क्या धारणा होती जा रही है—इसे अकेले करना ही बेहतर रहेगा या सहयोग से बेहतर है टकराव. जाहिर है, संयुक्त राष्ट्र के सामने यह एक बड़ी चुनौती है.

संयुक्त राष्ट्र स्वयं को सुधारने में सक्षम रहा है. अब जरूरत ज्यादा प्रभावी होने की है, दुनिया के लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य में ज्यादा सक्षम बनने की है. शांति और सुरक्षा क्षेत्र में कई ऐसे सुधार हैं जिनसे मैं संयुक्त राष्ट्र को रोकथाम, संघर्ष समाधान और शांति कायम करने से जुड़ा बनाने की कोशिशों में लगा हूं. यह विशेष रूप से उन देशों के लिए है जो संघर्ष के दौर से बाहर आ गए हैं और उन्हें शांति बहाल रखने में सक्षम बनाया जा सके. हम संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकायों में सुधार की भी कोशिशें कर रहे हैं और इसका मुख्य पहलू है सुरक्षा परिषद में सुधार करना.


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