हिन्दी की उपेक्षा पर सरकार को घसीटा अदालत में

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“भारतीय रुपये और आधार कार्ड परियोजना के पहचान चिन्ह (लोगो) के मामले में हिन्दी की उपेक्षा और संवैधानिक नियमों की अवहेलना के खिलाफ एक युवा ने भारत सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ दी है.श्री राकेश सिंह द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने गृह मंत्रालय को ११ जुलाई को जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है. “

आम तौर पर हिन्दी भाषी लोग हिन्दी की उपेक्षा और अवहेलना को नज़रअंदाज कर देते है और अपने काम से लग जाते है मगर इलाहाबाद का एक युवा ऐसे दो मामलों में अपनी आँख बंद करने की जगह भारत की केन्द्र सरकार की आँखे खोलने की कोशिश कर रहा है.

मामला भारत की मुद्रा रुपये और आधार कार्ड परियोजना के पहचान चिन्ह की प्रतियोगिता से जुडा हुआ है.केंद्र सरकार ने इन दोनों का पहचान चिन्ह बनवाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की थी. दोनों ही प्रतियोगिता के नियम और शर्तों की जानकारी देने वाले विज्ञापनों और अन्य प्रचार सामग्री सिर्फ अंग्रेजी में बनाई गयी जबकि भारत का राजभाषा अधिनियम केंद्र सरकार को हिन्दी भाषा के उपयोग का निर्देश देता है.इसके अलावा इनमे कुछ अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं का भी उल्लंघन किया गया था.

सरकार द्वारा हिन्दी की उपेक्षा और संवैधानिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के विरुद्ध श्री राकेश सिंह ने अपने वकील के माध्यम से दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है. उनकी इस याचिका पर अदालत ने ११ जुलाई को गृह मंत्रालय को तलब किया है.अपनी इस याचिका में उन्होंने लिखा है कि भारत की ८० प्रतिशत जनता हिन्दी समझती है.सरकार ने इन दोनों प्रतियोगिताओं में हिन्दी का उपयोग न करके इन लोगों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने से भी वंचित रखा और संविधान की अवहेलना भी की.

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