मानव सेवा सबसे पुनीत कार्य

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चन्दौली (उ.प्र.)। साहित्य सुरसरि संस्था के तत्वावधान में साहित्य,संगीत के उद्भट विद्वान् प्रखर स्वतन्त्रता सेनानी स्वर्गीय अवध नाथ मिश्र के पुण्य तिथी (29.11.15) पर मुगल सराय यूरोपियन कालोनी में आयोजित काव्यान्जलि में उपस्थित साहित्यकारों एवम् कवियों ने स्वर्गीय मिश्र को श्रद्धा सुमन अर्पित किया तथा इस अवसर पर समाज सेवा के विविध आयाम विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।सभा में साहित्य सुरसरि संस्था के पदेन अध्यक्ष साहित्य मर्मज्ञ समालोचक उपन्यासकार कहानीकार मानस मर्मज्ञ डा.कमलाकांत त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए निम्न पंक्तियों में भावांजलि दी।
योग्यता-पात्रता पावनी लेखनी
अद्वैत विषयस्य व्याख्यायिका
सद्विचारों तरंगायते मानसे
अवध नाथ मिश्र चिरनन्दतु ।
सभा में उपस्थित कथाकार रामजी भैरव ने भावनात्मक मानवीय सेवा को समाज सेवा का महत्व पूर्ण आयाम बताया। सहस्त्रबुधे ने कर्मशील होकर समाज में जागृति लाने को प्रमुखता दी। प्रो.देवेश पांडे ने शिक्षा के प्रति आनेवाली पीढ़ी को जागरूक करने को समाज सेवा के रूप में रेखांकित किया।समालोचक, चिंतक सतीश चन्द्र मिश्र ने मनसा वाचा कर्मणा के अनुरूप समाज सेवा पर बल दिया,तात्पर्य व्यक्ति और समाज में व्याप्त कमी को भाव से पूरा करना हीं समाज सेवा का सर्वग्राह्य आयाम है।पत्रकार एवम् ओजस्वी वक्ता कमलेश तिवारी अपने प्रति सच्चे मनसे समर्पणह को समाज सेवा के लिए समर्पित होने कि आवश्यकता पर बल दिया। वाराणसी से पधारे नागरी प्रचारणी सभा के सम्पादक तथा हास्य व्यंग के हस्ताक्षर ब्रजेश पाण्डेय जी ने निःस्वार्थ रूप से किये गए कार्य को उत्तम समाज सेवा कहा।वाराणसी से पधारे शास्त्रीय संगीत गायक पण्डित मोहन तिवारी मधुर ने संगीत को समाज सेवा का उत्तम एवम् सर्वग्राह्य आयाम बताया, क्योंकि संगीत में साहित्य अंतर्निहित है। पुस्तक पथ के सम्पादक डा.एल उमाशंकर ने सामाजिक असमानता का अध्ययन तथा उनके उन्मूलन के सर्वग्राही विचारों के क्रियान्वयन को समाज सेवा के उत्तम आयाम के रूप में प्रतिपादित किया। अधिवक्ता एवम् कवि पाठक जी ने सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन को उत्तम सेवा कहा।
काव्यान्जलि में उपस्थित सभी वक्ताओं ने स्वर्गीय मिश्र के कृतित्व एवम् व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा किये गए शैक्षणिक और सामाजिक योगदान को वर्तमान पीढ़ी के द्वारा अनुकरण करने कि  आवश्यकता पर बल दिया।काव्यान्जलि में उपस्थित कवियों ने काव्य पाठ से समाज को अर्थपूर्ण सन्देश देते हुए श्रोताओं के मन को खूब गुदगुदाया।
सभा की अध्यक्षता डा.कमलाकांत त्रिपाठी ने की तथा संचालन डा.एल उमाशंकर ने किया। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बुद्धिहीन ने अपने पिता गुरु स्वर्गीय मिश्र के पुण्य तिथी पर आयोजित भावांजलि में पधारे साहित्यकार कवि पत्रकार समालोचक और प्रबुद्ध श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।