आम जनता – अनन्तराम चौबे

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी
विषय… आम जनता
नाम.. अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर म प्र
कविता…

आम जनता

स्वतंत्र देश में स्वातंत्रता का
बस नाम सा ही तो रह गया है ।
देश की बनती नीतियों के आगे
आम जनता का जीना मुश्किल है

अमीर गरीब बस दो ही है
दोनों ही देश में खुश हाल है ।
आम जनता मिडिल वर्ग का
सारा सच जीना  मुश्किल है ।

सरकारें जितनी घोषणा करतीं
सब गरीबों को मिल जाती  हैं ।
आम जनता को कुछ न मिलता
बस घोषणाएं सुनने मिल जाती है

टैक्स के नाम आम जनता से
सभी टैक्स ही बसूले जाते हैं ।
इन्कमटैक्स में कोई छूट नही
सभी प्रकार का टैक्स बसूलते हैं।

इनकम टेक्स प्रदेश टेक्स फिर
नगरनिगम का टेक्स लगता है।
जल, मकान, रोड़  टेक्स चुग्गी
टेक्स टोल टेक्स भी लगता है।

सारा सच इतने टेक्स भर-भर
कर ही आम जनता परेशान है ।
विजली का बिल ऐसा आता है
बिल देखकर आम जनता हैरान हैं ।

आम जनता का बस नाम है
अमीर गरीब के बीच पिसती है ।
फायदा जातिगत गरीब लेते है
सारा सच इनको ही मिलती है।

हमारे ही देश आम जनता का
बस नाम लिखा रह गया है ।
नियम कानून में बंधकर ही
आम इंसान कैसे जी रहा है ।

प्रधानमंत्री आवास योजना में
लाखों मकान आंकड़ों में बनते हैं ।
समझ में ये कुछ नही आता है
किसको ये आवास मिलते हैं ।

ब्राह्मण, बनिया, ठाकुर के घर
पैदा होना अभिशाप बन गया है।
पढ़-लिखकर इनके बच्चों का
जीवन अंधकारमय हो रहा है ।

अपने ही देश में यहां मजबूर
होकर आम इंसान रह गया है ।
देश की आम जनता का नाम
बस बोट देने का रह गया है ।

अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र /3142/
8/2/2022
9770499027
मौलिक व स्वरचित