आडवाणी के त्यागपत्र के निहितार्थ

जो भी हो देश के सामने ये बात स्पष्ट हो गयी कि राजनीति में अब न तो नैतिक मुद्दे कोई मायने रखते हैं और न हीं बड़े राजनेता। यदि कुछ बड़ा है... Read more »

धोखेबाज़

यारों इस बरस तो गर्मी खूब है इसी लिए अपने दिमागी की बत्ती एकदम फ्यूज है कशमकश में अपनी ज़िन्दगी है दिल का करें वो भी कन्फूज है कनेक्ट करने की जो कोशिश की हर कनेक्शन का फ्यूज भी लूज़… Read more »

खुरचे हुए शब्द

खुरचे हुए शब्द नाखूनों से , दांतो से और निगाहों से बेजान हैं जान नहीं बची वो अंडे भी तो टूट चुके हैं उस घोंसले में बेवक़्त और ढो रहा है भार वो घोंसला उन टूटे अंडों का और तब… Read more »

नई सोच का परिणाम है पितृ दिवस

मित्रों, पितृ दिवस पर कितने ही लोगों ने लिख डाला है। पाश्चात्य का एक और प्रभाव लोगों के दिलो दिमाग पर राज करने लगा है। क्या पिता को मनाने के लिए किसी... Read more »

पिता

एक छाँव का छाता ,, कड़ी धूप से बचाता एक प्रबल सबल  ,,प्राय: दोनो हाथ लुटाता एक पर्वत अचल  ,,अडिग साहस जगाता एक चमकीला सूर्य  ,,रोशनी का अंबार लगाता एक अनंत आकाश  ,,ऊँचाई की राह बताता एक कठोर शिला   ,,नाजुक… Read more »

धूरी

कब तक बदहवास में चलती रहोगी एक ही धूरी से एक ही रेखा पर धागे भी टूट जाते हैं सीधा खींचते रहने पर अंधेरा नहीं है तो पैर नहीं डगमगायेंगे पर ये धूरी बदल रही है सीधी ना होकर गोल… Read more »

पोटली

इस समतल पर पॉव रख वो चल दी है आकाश की ओर हवाओं का झूला और घाम का संचय कर शाम के बादलों से निमित्त रास्ते से अपने गूंगेपन के साथ वो टहनियों में बांधकर आंसूओं की पोटली ले... Read more »

Mrs.मोतिया !!

मेरे ब्लॉग के पिछले पोस्ट पर मेरे एक बेटे का कहना था कि कहानी के पात्र को बदल दिया जाये तो पुरुष की जगह महिला होगी सज़ा की हकद्दार …. उन्हे कहना चाहती... Read more »

ये सही तो नहीं है ना …. ??

ध्यान(योग)की सारी विधियाँ जागरण की विधियाँ ही होती हैं …. कैसे भी हो बस जाग जाना है ….कोई अलार्म लगा कर जाग जाता है …  कोई पड़ोसी से कह देता है कि द्वार पर... Read more »

क्या सज़ा मिलनी या होनी चाहिए …. ??

एक पत्नी जब भी अपने पति का mobile छूती …. उसके पति झपाटा मार कर mobile छिन लेते और अक्सर डांट पड़ती पत्नी को कि वो पति का mobile ना छूए ….... Read more »