आवाज़

आवाज़ जो धरती से आकाश तक सुनी नहीं जाती वो अंतहीन मौन आवाज़ हवा के साथ पत्तियों की सरसराहट में बस महसूस होती है पर्वतों को लांघकर सीमाएं पार कर जाती हैं उस पर चर्चायें की जाती हैं पर रात… Read more »

जब अन्याय और अत्याचार चर्म पर पहुँचता है तो नक्सलवाद जन्मता है!

जब अन्याय और अत्याचार चर्म पर पहुँचता है तो नक्सलवाद जन्मता है!  महाराष्ट्र के एक गॉंव में एक आततायी द्वारा कई दर्जन महिलाओं के साथ जबरन बलात्कार किया जाता रहा। पुलिस कुछ करने के... Read more »

पीडि़तों के जख्मों पर हवाई दौरे का नमक

एक पूरी की पूरी स्पेशल ट्रेन को रेलवे की भाषा में सेलून कहते हैं। बिटीश जमाने में अंग्रेज अधिकारी इसमें सफर किया करते थे। आज भी रेल मंत्री , रेल राज्य मंत्री... Read more »

हर रूप में वंदनीया हो स्त्री!

तुम स्त्री हो! माँ !तुम दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री हो और तुमसे ही मैं हूँ यह मैंने कब कहा लेकिन फिर भी पत्नी ने सुन लिया हे मेरी प्राण प्रिये! दिल से कहते -सुनते हुए भी मुखर हो यह… Read more »

बृहत् प्रामाणिक हिंदी कोश की समीक्षा

            रिपोर्टः–   शीर्षकः- बृहत् प्रामाणिक हिन्दी कोश।   प्रकाशनः- लोकभारती प्रकाशन, दरबारी बिल्डिंग, एम. जी. रोड़, इलाहाबाद।    मूल संपादकः- आचार्य रामचन्द्र वर्मा। संशोधन-परिवर्धनः- डॉ. बदरीनाथ कपूर।    पृष्ठ संख्याः- 1088.    शब्द संख्याः-… Read more »

आडवाणी के त्यागपत्र के निहितार्थ

जो भी हो देश के सामने ये बात स्पष्ट हो गयी कि राजनीति में अब न तो नैतिक मुद्दे कोई मायने रखते हैं और न हीं बड़े राजनेता। यदि कुछ बड़ा है... Read more »

धोखेबाज़

यारों इस बरस तो गर्मी खूब है इसी लिए अपने दिमागी की बत्ती एकदम फ्यूज है कशमकश में अपनी ज़िन्दगी है दिल का करें वो भी कन्फूज है कनेक्ट करने की जो कोशिश की हर कनेक्शन का फ्यूज भी लूज़… Read more »

खुरचे हुए शब्द

खुरचे हुए शब्द नाखूनों से , दांतो से और निगाहों से बेजान हैं जान नहीं बची वो अंडे भी तो टूट चुके हैं उस घोंसले में बेवक़्त और ढो रहा है भार वो घोंसला उन टूटे अंडों का और तब… Read more »

नई सोच का परिणाम है पितृ दिवस

मित्रों, पितृ दिवस पर कितने ही लोगों ने लिख डाला है। पाश्चात्य का एक और प्रभाव लोगों के दिलो दिमाग पर राज करने लगा है। क्या पिता को मनाने के लिए किसी... Read more »

पिता

एक छाँव का छाता ,, कड़ी धूप से बचाता एक प्रबल सबल  ,,प्राय: दोनो हाथ लुटाता एक पर्वत अचल  ,,अडिग साहस जगाता एक चमकीला सूर्य  ,,रोशनी का अंबार लगाता एक अनंत आकाश  ,,ऊँचाई की राह बताता एक कठोर शिला   ,,नाजुक… Read more »