ग़ज़ल – खान बदरे आलम ” भिवंडी “

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गरीबी ने जो दिया वो अमीरी क्या देती ,

मखमल का बिस्तर तो देती मगर नीद नहीं देती

हो लाख आयेब  मुझमें छुपा लेती है अमीरी ,

गरीबी ठीक से तन भी ढकने  नहीं  देती

हमारे घर कच्चे है मगर ईमान पक्का है ,

यही खुददारी हमें  किसी के सामने झुकने नहीं देती ,

हमारी बस्तियों में चिरागो की जरुरत नहीं पड़ती ,

रोशनी मोहब्बत की कभी अंधेरा होने नहीं देती ,

कफ़न सब का एक जैसा होता है “आलम”

मौत भी अपने साथ कुछ भी ले जाने नहीं देती