रेल यात्रा : सरस्वती पुत्र के साथ चर्चा

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(डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’)  मैं रेल यात्रा पर हूँ। सामने वाली बर्थ पर एक ब्राह्मण देवता बैठे हुए, अखबार के पन्ने पलटते हुए कहने लगे SC, ST को 10 साल के लिए नौकरियों में रिजर्वेशन दिया था। जिसे हर 10 साल बाद बढ़ाया जाता रहा है। जिसके कारण जनरल के 5% लोगों को भी नौकरी नहीं मिल रही!

मैंने उनसे तपाक से पूछा कि 10 साल वाली बात कहाँ से पता चली?

ब्राह्मण देवता बोले, मैं MA, LLB हूँ। मुझे पता है! और कुछ दिनों पूर्व राजस्थान पत्रिका के सम्पादकीय में भी आपने पढ़ा होगा कि 10 साल के लिए नौकरियों में आरक्षण दिया गया था! जिसे हर 10 साल बार बढ़ाया जाता रहा है! पत्रिका से ये भी पता चला कि वोट के लिए नेताओं ने भी बाद में संविधान में संशोधन कर के संसद और विधानसभा में अपना रिजर्वेशन करवा लिया!

मैंने उनसे पूछा कि शर्मा जी आपने LLB की पढ़ाई की है तो पता होगा कि संविधान के किस अनुच्छेद में नौकरियों का आरक्षण बढ़ाया और किस अनुच्छेद में MLA, MP का आरक्षण संशोधन के जरिये डाला?

शर्मा जी कहने लगे कि LLB किये बहुत समय हो गया, अब अनुच्छेद तो याद नहीं, लेकिन मुझे अच्छे से याद है कि संविधान में नौकरियों का आरक्षण केवल 10 साल के लिए ही था!

अंत में शर्मा जी से मैंने पूछा कि जनरल के केवल 5% लोगों को ही नौकरी मिल रही है, ये आपको कहाँ से पता चला?

शर्मा जी बोले, कुछ माह पूर्व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के साथ RSS के स्वयं सेवकों की चर्चा में शामिल मेरे एक मित्र ने मुझे ये बात बतलाई! जिसमें तय किया गया कि अब भाजपा की राज्य सरकार जनरल के अधिकतम लोगों को नौकरी देगी!

इतनी बात बताने के बाद शर्मा जी ने मुझ से पूछा आप बणिया हो या बामण? मैंने कहा नहीं शर्मा जी, मैं इन फरेबी जातियों में से नहीं हूँ! मैं इस देश का मूल निव्वासी हूँ! मैं आदिवासी हूँ! मैं सरस्वती पुत्र नहीं असुर और राक्षस वंशी मीणा जाति से हूँ! मैं विदेशी आर्य नहीं, अनार्य हूँ!

शर्मा जी शक्ल देखने लायक थी! मुझे HRD के प्रदेश अध्यक्ष श्री शशि मीणा जी की कही बाद याद आ गयी, कि जब भी मौका मिले, सरस्वती पुत्रों की असलियत सामने लाई जाए!

मैंने अपना टेबलेट निकाला और शर्मा जी को पत्रिका का सम्पादकीय दिखाया जिसमें 10 के लिए नौकरियों के आरक्षण की झूठी बात लिखी है! साथ ही पुलिस को पेश रिपोर्ट की इमेज भी दिखाई! कुछ अन्य यात्री भी इस बात को देखकर और पढ़कर चकित रह गए कि नौकरियों का आरक्षण संविधान में स्थायी मूल अधिकार है! मैंने और भी अनेक भ्रामक तथ्यों की सही जानकारी दी तो सरस्वती पुत्र की हालत पतली हो गयी!
शर्मा जी चुपचाप नींद का बहाना किये अपनी बर्थ पर लेते हुए हैं और मेरी ओर से ये जानकारी आप सभी अनार्यों की सेवा में प्रस्तुत है!

मित्रो जब भी मौक़ा मिले हमें सबूतों के साथ अपनी बात कहनी और लिखनी चाहिए! चर्चा को बहस में नहीं बदलें! शान्ति और धैर्य पूर्वक सटीक बाक कहें। फिर देखें हम समस्त अनार्य, आर्यों के मनुवादी षड्यंत्र से कैसे मुक्त होते हैं!-10.06.2015
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शंका समाधान
सवाल : आरक्षण तो 50%तक ही मिल सकता है, बाकि के 50% पर तो जनरल वालो की नोकरी लगी हुई हे फिर ब्राह्मण देवता 5%से भी कम जनरल कास्ट को नौकरी में क्यों बता रहे हैं?
समाधान: श्री बाबू लाल मीणा जी आपने बहुत ही अच्छा सवाल पूछा है! इससे हमारे अनेक मित्रों की अनेक शंकाओं का समाधान हो जाएगा! वास्तविकता यह है कि इन श्री शर्मा जी और इन जैसे करोड़ों लोगों को बरगलाने के लिए RSS द्वारा आंकड़ों का खेल या कहो आंकड़ों की बाजीगरी का जादू चलाया जाता है! जिससे आरक्षित वर्ग के खिलाफ अनारक्षित वर्ग के मन में जहर भरा जा रहा है!
मेरे पूछने पर की जनरल को केवल 5% नौकरी ही कैसे इस सवाल का श्री शर्मा जी तो कोई सन्तोषजनक जवाब नहीं दे पाये, यद्यपि इन्होंने भी RSS  का ही नाम लेकर पल्ला झाड़ लिया!
इस विषय को समझने के लिए एक उदाहरण पेश है:-
कुछ वर्ष पूर्व ऐसा एक मामला मेरी जानकारी में भी आया था, जिसमें केंद्र सरकार के अधीन कुल 22 पदों की रिक्तियों की विज्ञप्ति निकाली गयी थी! जिसमें 3 पद SC&ST के लिए और 4 पद ओबीसी के लिए आरक्षित थे! जबकि 6 पद अजा एवं अजजा के बैक लोग के थे! इस प्रकार कुल 22 में से 13 पद आरक्षित वर्ग के लिए दर्शाये गए! अंतिम रूप दे जारी चयन परिणाम में 2 अजा के और 3 ओबीसी के उम्मीदवार अनारक्षित मेरिट में चयनित हो गए! इस प्रकार कुल 22 पदों में से 18 पदों पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार चयनित हो गए! जिसे संघ की ओर से जमकर आरक्षित वर्ग के विरूद्ध मीडिया में उछाला गया था! लेकिन इस बारे में संविधान में स्पष्ट प्रावधानों के कारण कुछ कर नहीं सके!
संघ ऐसे उदाहरण पेश कर के अनारक्षित वर्ग के लोगों के मन में आरक्षित वर्ग के विरुद्ध लगातार जहर भरता रहता है और मेरिट में चयनित होने वाले उम्मीदवारों की भी आरक्षित पदों पर ही गणना करवाने का नियम बनवाने के लिए जमकर षड्यंत्र करता रहता है! जिसमें कोर्ट के मार्फत अनेक विभागों में संघ को आंशिक सफलता मिलना शुरू भी हो चुकी है!
वर्तमान सरकार इस प्रकार के संघी षड्यंत्र का हिस्सा बनती है तो संविधान में संशोधन करना होगा! जो बहुत मुश्किल है! फिर सतर्कता जरूरी है! कोर्ट के मार्फत हमारे खिलाफ कुछ भी असम्भव नहीं!

 

 


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