पुस्तक समीक्षा, अन्नपूर्णानन्द के साहित्य संसार का आकलन

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किसी दिवंगत साहित्यकार के जीवन संघर्ष व रचना संसार को समझने के लिए उसके द्वारा लिखित आत्मकथा या डायरी को विष्वसनीय स्त्रोत माना जाता है, उसके बाद नम्बर आता है अंतरंग, परिचित, सहयोगी व सम्बंधित लोगों के संस्मरणों का। इस पुस्तक में डा0 सपना सिंह ने उनके पारिवारिक सदस्यों, सम्बंधियों व साहित्यिक मित्रों और प्रसंशकों के संस्मरण एवं विवेचना संग्रह करके महत्वपूर्ण कार्य किया है। डा0 सम्पूर्णानन्द जिनके नाम पर वाराणसी में संस्कृत विष्वविद्यालय स्थापित है, जिनके स्वतंत्रता संग्राम और राजनैतिक जीवन से सब परिचत हैं मगर उनके छोटे भाई साहित्यकार अन्नपूर्णनन्द जी के बारे में कुछ ज्यादा लिखा-पढ़ा नही गया है।
यह पुस्तक अन्नपूर्णानन्द के जीवन-कार्य तथा साहित्य साधना का सर्वांगीण परिचय ही नहीं प्रस्तुत करता बल्कि उनके कार्य तथा साधना का सूक्ष्म विशलेषण कर उन समस्त विशेषताओं को अधोरेखित भी करता है। पुस्तक में कुछ 33 अध्याय हैं, जिसमें अन्नपूर्णानंद के करीबी लोगों के संस्मरण को लेखों के रूप में पेश किया गया है। लेखिका ने अन्नपूर्णानंद के रचना संसार पर पी.एच.डी. किया है जिसे संकलित करके अपनी अथक निष्ठा और लगन का परिच दिया है।
इस पुस्तक में अन्नापूर्णानन्द के जीवन और व्क्तित्व की झांकी तो मिलती ही है उनकी रचनाओं की अन्तर्वस्तु, शिल्प और सौन्दर्य पर भी प्रकाश मिलता है। अन्नापूर्णानंद के उपन्यास, कहानी एवं कविताओं में तत्कालीन समाज की सामाजिक, राजनैतिक, षैक्ष्णिाक, आर्थिक, धार्मिक व सांस्कृतिक हालात का स्पष्ट चित्रण मिलता है। अन्नपूर्णानन्द जी को उनके व्यंग्य विद्या के लिए साहित्य संसार याद रखता है। अकबरी लोटा, बिलवासी मिश्र, मेरी हजामत उनकी कालजयी रचना है। प्रस्तुत पुस्तक में लेखिका ने उनके साहित्य के सभी पक्षों को बड़े सलीके से उनके परिचितों के आलेखों से पेष किया है।
अन्नपूर्णानन्द साहित्य पर अधावधि प्रकाशित प्रबन्धों में यह प्रबंध अपना अलग स्थान रखता है। साहित्य के अध्येताओं की आकलन परिधि के विस्तार की दृष्टि से यह निश्चय ही उपयोगी रचना है।

पुस्तक- पारखी नजरों में श्री अन्नपूर्णानन्द, लेखिका- डा0 सपना सिंह,
प्रकाशक- क्षितिज प्रकाशन, वाराणसी, मूल्य- 300 रूपये।

एम. अफसर खां सागर