Cannes के 71 साल में भारत, पहली बार दिखाई गई थी देव आनंद के भाई की ये फिल्म

फ्रांस का कान इस साल 71वां इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल मना रहा है. इस बड़े सिनेमा उत्सव में दुनियाभर के फिल्म निर्माता, निर्देशक और कलाकार हिस्सा लेते हैं. तमाम भाषाओं की फिल्मों की स्पेशल स्क्रीनिंग होती है और कलाकार यूनिक गेटअप में रैंप वॉक भी करते हैं. इनमें भारतीय भी शामिल होते हैं. इस साल के फेस्टिवल में भी तमाम भारतीय फिल्म निर्माता-निर्देशक और कलाकार शामिल हो रहे हैं. कान फिल्म फेस्टिवल में भारत का इतिहास बहुत पुराना है. आइए जानते हैं क्या है कान में भारत की कहानी.

#1. कान में भारत की एंट्री 1946 में हुई थी. चेतन आनंद की फिल्म “नीचा नगर” को ग्रांड प्रिक्स अवॉर्ड मिला था. इस फिल्म को विश्व स्तर पर पहचान पाने वाली भारत की पहली फिल्म के तौर पर भी जाना जाता है. फिल्म में कामिनी कौशल और अदा सहगल अहम किरदारों में थे.

#2. साल 1950 में चेतन आनंद इंटरनेशनल ज्यूरी में भारत की तरफ से पहले सदस्य बने. उनकी फिल्म (नीचा नगर) को जो ग्रांड प्रिक्स अवॉर्ड मिला था उसे अब पाम डीओर के नाम से जाना जाता है.

#3. 1952 में मराठी कवि होनाजी बाला की बायोपिक फिल्म “अमर भूपाली” को पाम डीओर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया. लेकिन वसंत देसाई और मंगेशकर बहनों द्वारा दिए गए संगीत ने ऐसा जादू चलाया कि वी. शांताराम के निर्देशन में बनी यह फिल्म बेस्ट साउंड रिकॉर्डिंग का अवॉर्ड जीत गई.

#4. साल 1955 में राज कपूर की फिल्म “बूट पॉलिश” को इस फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल डिस्टिंक्शन अवॉर्ड मिला. फिल्म में बेबी नाज के काम को बहुत सराहा गया था.

#5. साल 1956 में सत्यजीत रे की फिल्म पाथेर पांचाली को गरीबी की एक हिला देने वाली कहानी दिखाने के लिए पाम डीओर अवॉर्ड मिला था.

#6. साल 1957 में राजवंश खन्ना की डॉक्यूमेंट्री गौतम: द बुद्धा ने कान्स में ज्यूरी प्राइज जीता.

#7. 1957 के बाद काफी वक्त तक कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत ने कोई अवॉर्ड नहीं जीता, लेकिन सत्यजीत रे, श्याम बेनेगल और विमल रॉय जैसे मेकर्स की फिल्मों की स्क्रीनिंग होती रही.

#8. साल 1980 में मृणाल सेन को इंटरनेशनल ज्यूरी का सदस्य बनाया गया और अगले ही साल उनकी फिल्म ‘खारिज’ ज्यूरी प्राइज जीत गई.

#9. साल 1988 में मीरा नायर की फिल्म “सलाम बॉम्बे” को ऑडियंस प्राइज और डीओर अवॉर्ड मिला. अगले साल पुलिस क्रूरता की कहानी पर बनी फिल्म Piravi को कैमरा डीओर कैटेगरी में स्पेशल मेंशन अवॉर्ड दिया गया.

#10. मुरारी नायर की मलयालम फिल्म Marana Simhasanam ने साल 1999 में कैमरा डीओर अवॉर्ड जीता.

#11. साल 2002 में संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म ‘देवदास’ की कान्स फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई और साल 2003 में ऐश्वर्या राय कान्स की इंटरनेशल ज्यूरी में पहली भारतीय महिला सदस्य बनीं.

#12. साल 2002 में बी मनीष झा की फिल्म A Very Very Silent Movie ने ज्यूरी अवॉर्ड जीता था.

#13. साल 2006 में तमिल फिल्म Veyil की कान्स में स्क्रीनिंग की गई और यह पहली तमिल फिल्म थी जिसकी कान फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई.

#14. साल 2010 में आदित्य मोटवानी की फिल्म उड़ान की Un Certain Regard कैटेगरी में स्क्रीनिंग की गई. यह फिल्म 17 साल के लड़के रोहन की भावुक कर देने वाली कहानी थी.

#15. साल 2011 में निर्देशक विमुक्ति जयसुंदरा की इंडो-बंगाली फिल्म छत्रक Director’s Fortnight सेक्शन में स्क्रीनिंग हुई.

#16. साल 2012 में मुंबई के अंडरवर्ल्ड की कहानी पर आधारित फिल्म “मिस लवली” का कान्स में प्रीमियर हुआ और अनुराग कश्यप की फिल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” की स्क्रीनिंग डायरेक्टर्स फोर्टनाइट सेक्शन में की गई.

#17. हॉलीवुड फिल्म The Great Gatsby में अमिताभ बच्चन के कैमियो अपीयरेंस के एक बाद साल 2013 में अमिताभ को कान्स फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत करने के लिए चुना गया. इसी साल बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन और नंदिता दास को इंटरनेशनल ज्यूरी का मेंबर चुना गया.

#18. साल 2014-2015 में बॉम्बे टॉकीज, मॉनसून शूटआउट, लंचबॉक्स, तितली और मसान जैसी फिल्मों की अलग-अलग कैटेगरीज में स्क्रीनिंग हुई.

#19. साल 2016 में बाहुबली- द बिगनिंग, रमन राघव 2.0 समेत 6 फिल्मों की कान में स्क्रीनिंग हुई.

#20. साल 2017 बॉलीवुड के लिए रूखा रहा और कोई फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल में जगह नहीं बना सकीं.