नाम बताये बिना आरटीआई

नाम बताये बिना आरटीआई
नाम बताये बिना आरटीआई आश्‍चर्यजनक तथ्य तो यह है कि पुलिस तो बदनाम है ही, लेकिन सबसे अधिक आईएएस अफसरों को इस बात से पीड़ा होती है कि सामाजिक कार्यकर्ता काले कारनामों के विरुद्ध क्यों कार्य करते हैं। इससे ये… Read more ›

जन का मन है, मीडिया

जन का मन है, मीडिया
( डा. नीरज भारद्वाज ) मीडिया आज के समाज का एक हिस्सा बन चुका है। इसी के चलते आज सूचनाओं की बाढ आ गई है। विचार करें तो आज इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया दोनो की ही पहुंच का बढ़ना लोकतंत्र… Read more ›

दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय

दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय
अधिकतर स्त्रियों को वास्तव में इस बात का ज्ञान होता है कि वे जिस पुरुष से विवाह रचाने जा रही हैं, वह पहले से ही विवाहित है और उसकी पत्नी जिन्दा है। फिर भी वे एक निर्दोष स्त्री के वैवाहिक… Read more ›

हॅंसना जरुरी है।

हॅंसना जरुरी है।
(डॉ. नीरज भारद्वाज) टेलीविजन  पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम धीरे-धीरे अपना दायरा बढाने में सफल होते नजर आ रहे हैं। जिस दौर में भारतीय टेलीविजन ने शुरुआत की थी उस समय उसके पास सिर्फ एक ही चैनल था और वह… Read more ›

भाजपा को सत्ता मिली तो दशकों तक कीमत चुकानी होगी!

भाजपा को सत्ता मिली तो दशकों तक कीमत चुकानी होगी!
भारतीय जनता पार्टी का हर एक कार्यकर्ता और राजनेता बार-बार इस बात को नकारता आया है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भाजपा के राजनैतिक मामलों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप रहता है। लेकिन पहले नितिन गडकरी की और अब… Read more ›

नई पीढ़ी की फिल्में और हम

नई पीढ़ी की फिल्में और हम
(डॉ. नीरज भारद्वाज) आज का समाज जितनी तेजी से बदल रहा है। इसकी कल्पना शायद ही किसी न की होगी। मानव मूल्यों के विघटन के इस दौर में हर एक चीज बिकाऊ नजर आने लगी। हमारी हंसी -मजाक, रोना आदि… Read more ›

अब राजनीतिक पाप भी धोने लगी गंगा…!!

अब राजनीतिक पाप भी धोने लगी गंगा…!!
(तारकेश कुमार ओझा) पापियों के पाप धोते – धोते गंगा कब की मैली हो चुकी। नौबत इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने तक की आ गई है। सरकारों द्वारा करोड़ों रुपए फूंकने के दावों के बावजूद गंगा अब तक मैली की… Read more ›

आधुनिक अर्थशास्त्रियों का (अर्ध-सत्य)

आधुनिक अर्थशास्त्रियों का  (अर्ध-सत्य)
ü कोट टाई नहीं धोती कुर्ता को दे सम्मान    ü कब समझेंगे हम कौटिल्य का अर्थशास्त्र  ..  देश का हर आदमी महंगाई से त्रस्त दिख रहा है। रुपया अपना सम्मान खोता जा रहा है। डॉलर रोद्र रूप दिखाता चला जा… Read more ›

हिंसा नहीं साथ चाहिए

हिंसा नहीं साथ चाहिए
(डॉ. नीरज भारद्वाज)धर्म, आस्था, राजनैतिक हानि-लाभ, साम्प्रदायिकता आदि के नाम पर यह देश कब तक ऐसे दंगों को सहता रहेगा। यह सवाल बार-बार जहन में उठता है और दब जाता है। आखिर यह हिंसा कब रुकेगी। कितने ही साहित्यकार और… Read more ›

जब हम खुद ही हैं, दुश्मन अपने आपके…?

जब हम खुद ही हैं, दुश्मन अपने आपके…?
पुलिस के सिपाही से लेकर पुलिस महानिदेशक तक किसी के लिये भी कानून की शिक्षा की अनिवार्यता नहीं है, इस कारण पुलिस का पूरा का पूरा महकमा कानून और कानून की गहन-गम्भीर न्यायिक अवधारणा से पूरी तरह से अज्ञानी और… Read more ›