बंगाल चुनाव/राजनैतिक पार्टियां – अनन्तराम चौबे अनन्त

राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु विषय.. बंगाल चुनाव/राजनैतिक पार्टियां नाम.. अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर म प्र कविता… बंगाल चुनाव/ राजनैतिक पार्टियां राजनैतिक पार्टियां हमेशा अपना उल्लू सीधा करती हैं । सत्ता की कुर्सी पाने चुनाव में… Read more »

साहित्य संगीत कला विहीन – डॉ रुपाली दिलीप चौधरी

कला डॉ रुपाली दिलीप चौधरी डॉअन्नासाहेब जी डी विंडाले महिला महाविद्यालय जलगांव साहित्य संगीत कला विहीन साक्षात पशु पुच्छ विषाणु ही न कला शब्द अत्यंत व्यापक है सदियों से कला जगत का अपना गौरवशाली इतिहास... Read more »

चुनाव – कवि सुरेन्द्र कुमार जोशी

*अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य प्रतियोगिता मंच “हमारी वाणी”* *प्रतियोगिता का विषय- पांच/ पंचायत /महा पंचायत/ जिला पंचायत/ चुनाव /उपचुनाव /नगर निगम* **चुनाव* निर्वाचन आयोग चुनाव आयोग एक ही काम नाम आधार सदा करवाते चुनाव चुनकर सेवक बने सरकार चुनाव करें... Read more »

जय जवान जय किसान – डॉ रुपाली दिलीप चौधर

डॉ.अन्नासाहेब जी.डी.बेंडाले महिला महाविद्यालय जलगांव ‘ धरती से तेरा अनोखा रिश्ता, तुमने दिया स्थान पिता तथा माता! बना दिया ऐसा अलग ही नाता, धरती को समर्पित, सारा सच जय जवान जय किसान ही कहलाता!!!’ जय जवान जय... Read more »

बहार रोमांस की – प्रा.डावरे रोहिणी बालचंद

नाम – प्रा.डावरे रोहिणी बालचंद जिला-अहमदनगर(महाराष्ट्र) 🌹बहार रोमांस की🌹 ~प्रा.रोहिणी डावरे। –*–*–*–*–*–*–*–* इजहार ए मुहब्बत का अवसर बेहतरीन चौदह फरवरी की दुनिया रंगीन संत रोम के व्हॅलेंटाईन ‘प्रेम ही जीवन’ सीख हसीन।1। राजा क्लाॅडियस था दिल से पत्थर जीवन जीता… Read more »

किसान आंदोलन – कुमार विनोद

कविता:- किसान आंदोलन मैं अब भी अपने खेतों में काम कर रहा हूँ, ये सड़कों पर ट्रेक्टर से जाम लगाने वाले कौन हैं| मुझे तो फुर्सत नहीं फसलों की बुआई और कटाई से, ये सरकार की... Read more »

26 जनवरी / गणतंत्र दिवस / संविधान दिवस / पेड़ / वीर भूमि

#अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य साप्ताहिक प्रतियोगिता – हमारी वाणी विषय – 26जनवरी/गणतंत्र दिवस/ संविधान दिवस / पेड़ / वीर भूमि विधा – कविता दिन – रविवार विश्व का सबसे बड़ा ह मारा लोकतंत्र, आज मना रहे हैं हम... Read more »

मुजरिम – पदमा तिवारी दमोह

कहेंगे किस को हम मुजरिम क्या है इसकी परिभाषा चोरी आवारगी करने वाले या बोलते जो गाली गलौच की भाषा।। नहीं हम सभी हैं गुनहगार सच को झूठ में बदलते हैं मिलता है संबल वल्लिष्ठों से यह गुनाह हम... Read more »

एक बार दुश्मन को दोस्त बनाके देखते हैं – रशीद अकेला

  “एक बार दुश्मन को दोस्त बनाके देखते हैं। नीम के पत्ते चबाके देखते हैं। चलो एक बार दुश्मन को दोस्त बनाके देखते हैं।!!1!! नाउम्मीदी में उम्मीद का द्वीप जलाके देखते हैं। दुश्मन को एक बार गले लगाके देखते हैं।… Read more »

प्रवासी – पदमा तिवारी दमोह

क्या कहूं दर्द है कितना प्रवासियों को देखा नहीं जाता हो रहा वापस शहर से गांव वह तो बैठ कर रो भी नहीं पाता।। कितनी स्थिति गंभीर है देख रहे इनकी तस्वीरें इतनी कड़ी धूप में चल रहे कैसी... Read more »