और कब तक

और कब तक
एक सुबह जब सूरज जागा दंग रह गया देख अभागा अंधियारे का लिये सहारा किसने वीर सपूत को मारा कैसे रचता धोखे का जाल जान न पाए रहा मलाल कितना सब्र है आज़माना देख रहा है सारा ज़माना तोड़ो सीमा… Read more ›

सीख लेना

सीख लेना
घूरा को घूरो और सीख लो तब का ज़माना ये नहीं था कि द्वारे द्वारे सीटी बजे और घर से कूड़ेदान बाहर रखा जाये ….. तब हर घर के थोड़ी दुरी पर बड़ा गढ़ा खोद कर रखा जाता था और… Read more ›

वक्त वक्त की टेर

वक्त वक्त की टेर
काअ हो तहरा घरे सभन चाचा लोगन के अलग अलग न्योता के कार्ड जाई नु ना ना हमरा घरे ऐ गो कार्ड जाई काहेए ….. जब हम तहरा भाई के शादी में अलग न्योता भेजनी अउरी तहरा चचेरा भाई बहीन… Read more ›

गोरे अपने इंग्लैण्ड वापस चले गए

गोरे अपने इंग्लैण्ड वापस चले गए
प्रो.उर्मिला पोरवाल “सेठिया” (बैंगलोर) 15 अगस्त 1947 को भारत की धरती से अंग्रेजों का राज्य समाप्त हो गया। यानि गोरे अपने इंग्लैण्ड वापस चले गये और देश पर अपने ही देशवासियों का शासन हो गया था। उस समय चारों ओर… Read more ›

वर्ण पिरामिड

शीर्षक = जयहिंद >>>> 1 है भीती अधीती जयहिंद हिम ताज है तोड़ न सका है जयचंद संघाती >>>>> 2 भू गीती चुनौती अग्रवर्ती नेक-नीयती जुडाये अकृती जयहिंद उदोती >>>> 3 स्व सत विजयी खल हारा गर्व हमारा जयहिंद नारा… Read more ›

ईमानदार जी – अरविन्द पाठिक

ईमानदार जी – अरविन्द पाठिक
बैठे ठाले टी वी ऑन किया तो पता चला ईमानदार जी की प्रेस कांफ्रेंस चल रही है .ईमानदार जी बहुत गुस्से में थे .मुझे लगा हो ना हो ईमानदार जी का मफलर चोरी हो गया हो और वे इसकी जांच… Read more ›