गरीबी – कु दुलेश्वरी मांझी

*शीर्षक – ” गरीबी “* किसने देखा है अमीरों को गरीबों के गलियों से गुजरते हुए, किसने देखा उन्हें बाजारों में कभी मोल भाव करते हुए, बिक जाती है जनाब यह ज़िंदगी इस मोल भाव की तरजू पर, देखते... Read more »

नया साल – आशा ठाकुर

  नया साल नयी वर्ष की नयी सुबह पर मिलकर नयी पहल करें मुरझा गए है जो रिश्ते प्रेम के जल को उनमें भरें। नए साल में स्वागत है खुशियों की बस इक चाहत है नया जोश नया उल्लास खुशियां… Read more »

विधार्थी – डॉ अशोक (बिहार)

विधार्थी। विधा चाहने वाला विधार्थी, कहलाता है। यह ज्ञान रूपी उपक्रम में, बालक किशोर युवा व, वयस्क भी उन्नत भाव में, समाज के इस जंग में , हृदय से उतर आता है। सुख चाहने वाले विधार्थी, यह सुख कभी नहीं… Read more »

मौकापरस्त – डॉ अशोक (बिहार)

  मौकापरस्त। यह अवसरवादी संस्कार है, निम्नतापी पुरस्कार है। उपयुक्त अवसर की तलाश, शरारती खेल है, दुनिया में खलबली मचा देने, वाला यह मेल है। जमानासाज अवसरवादी भी, खूब कहलाता है। कभी -कभी मोहब्बत इबादत , और नफ़रत भी, मौकापरस्त… Read more »

किसान ही अन्नदाता – संध्या कुमारी

*जिसकी वजह से जीते हैं वो किसान ही अन्नदाता है, लाख मुश्किलें झेल कर भी, हमारे पेट तक अनाज लाता है। *दर्द से भरी तो जिंदगी उनकी है, जो अपना पेट मार के हमारा... Read more »

नारी तुम महान करो खुद की पहचान – सीमा निगम

सारा सच हमारीवाणी *नारी तुम महान,,,,,करो खुद की पहचान* *सारा सच* यही है नारी सशक्तिकरण के इस युग में नारी द्वारा अपने बुने हुए स्वप्न संसार की, अपने सपनों को हकीकत में बदलने की... Read more »

सोशल मीडिया – डॉ.रूपाली दिलीप चौधरी

सोशल मीडिया डॉ.रूपाली दिलीप चौधरी (महाराष्ट्र) आज के दौर में मीडिया विमर्श की चर्चा गहनता से हो रही है | जिसमें फिल्म, अखबार ,वेब ,संगणक ,दूरदर्शन, पत्रिका यह सब मीडिया में छाया हुआ दिखाई... Read more »

सांसद विधायक – अनंतराम चौबे

राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु विषय… सांसद विधायक कविता… सांसद/विधायक सांसद या विधायक होI जनता ही इनको चुनती है । चुनाव जीतने के बाद में फिर मनमानी इनकी होती है । राजनैतिक पार्टियां हमेशा अपना उल्लू… Read more »

वृक्ष है संजीवनी – अश्मजा प्रियदर्शिनी

वृक्ष है संजीवनी #sarasach #hamarivani वृक्ष है संजीवनी हमारी वसुंधरा की हैं शान। धरती को स्वर्ग बनाते, जैसे ईश्वर का वरदान। प्राणवायु देते भरते हर जीव-जन्तु में जान। वृक्षों की शाखाओं पर बसते खग के प्राण। चमन में... Read more »

हाँ,मै एक डॉक्टर मौकापरस्त हूँ – डॉक्टर सुलेखा यादव

हे समाज,ना बनाओ मुझे भगवान, मै भी हूँ एक साधारन सा इन्सान, मै भी अपनी नीन्द गँवा करता इलाज हूँ, हां,मै एक मामुली सा डॉक्टर मौकापरस्त हूँ। जब सभी ज़िन्दगी के रागों मे पड़े मस्त थे, मै... Read more »