अधिकार हैं पर कई सवाल हैं

अधिकार हैं पर कई सवाल हैं
अधिकार हैं पर कई सवाल हैं  भारत का संविधान 26 जनवरी,1950 को लागू किया गया. संविधान की प्रस्तावना में उल्लेख है कि, ‘ हम. भारत के लोग भारत को एक प्रभुत्वसंपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों… Read more ›

इकरारनामा

इकरारनामा
हां मैं कबूलती हूं अपना हर अपराध नज़र से नज़र मिलाना चाहती हूं उन सदाचारियों और नेक दिल इन्सानों से जो दर्ज करा आए हैं मेरा अपराध हां, मैंने की अति व्यस्ततम लोगों के चेहरे पढ़ने की कोशिश अपने-अपनों की… Read more ›

पुस्तक समीक्षा, अन्नपूर्णानन्द के साहित्य संसार का आकलन

पुस्तक समीक्षा, अन्नपूर्णानन्द के साहित्य संसार का आकलन
किसी दिवंगत साहित्यकार के जीवन संघर्ष व रचना संसार को समझने के लिए उसके द्वारा लिखित आत्मकथा या डायरी को विष्वसनीय स्त्रोत माना जाता है, उसके बाद नम्बर आता है अंतरंग, परिचित, सहयोगी व सम्बंधित लोगों के संस्मरणों का। इस… Read more ›

साहित्य और पत्रकारिता

साहित्य और पत्रकारिता
कहा जाता है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है अर्थात् साहित्यिक परिणति ही साहित्य की वह लोकमंगल कि धारा है, जिससे समाज के इतिहास का पता चलता है और उससे विकास तथा प्रगति की धारा बनती है, अन्यथा दिशाहीन… Read more ›

सीमा पर से जल्दी आना। ईद मुबारक!

सीमा पर से जल्दी आना। ईद मुबारक!
              सीमा पर से जल्दी आना। ईद मुबारक! ईद मुबारक! अम्मा बोली जब भी आना भारत माँ का नक्शा लाना कभी न अपनी नाक कटाना माँ का कभी न दूध लजाना सर किसी का… Read more ›

किताबें जिन्दगी को राह दिखाती हैं- अहमद हसन

किताबें जिन्दगी को राह दिखाती हैं- अहमद हसन
                साहिल के गजल संग्रह पहला क़दम का हुआ लोकार्पण लखनउ। गोमतीनगर स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी प्रेक्षागृह में विगत 27 जनवरी को मोहम्मद अली साहिल के गजल संग्रह पहला कदम का लोकार्पण प्रदेश… Read more ›

गहनतम भावाभिव्यक्ति है :`रेत का समंदर ‘ -डा. नीरज भारद्वाज

गहनतम भावाभिव्यक्ति है :`रेत का समंदर ‘ -डा. नीरज भारद्वाज
                  कविता कवि के अंतर्मन की अनुभूति होती है |काव्य में कवि भाव में नहीं बहते दिखते ,बल्कि अपने मन के राग-विराग या सौन्दर्य को शब्दों के माध्यम से कागज़ पर उकेरते… Read more ›

दामिनी की अंतिम इच्छा

दामिनी की अंतिम इच्छा
            मैं जा रही हु सबको छोड़कर ,सबकी आँखों में आंसू भिगोकर , नहीं पता था ऐसा वक्त आएगा ,इन दरिंदों के हत्थे चढ़ जाउंगी, कह देना माँ से ,मत बहाएं आंसू , तेरी दामिनी… Read more ›

शायर-ए-आजम मिर्जा ग़ालिब

शायर-ए-आजम मिर्जा ग़ालिब
                        रगों में दौड़ने फिरने के हम नहीं कायल, जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है। उनकी शेरो-शायरी की पूरी दुनिया कायल है। आम लोगों… Read more ›

क्यों करती हो वाद-विवाद

क्यों करती हो वाद-विवाद
            क्यों करती हो वाद-विवाद बैठती हो स्त्री विमर्श लेकर जबकि लुभाते हैं तुम्हें पुरुषतंत्र के सारे सौंदर्य उपमान सौंदर्य प्रसाधन, सौंदर्य सूचक संबोधन जबकि वे क्षीण करते हैं तुम्हारे स्त्रीत्व को हत्यारे हैं भीतरी… Read more ›