कोरोना – राखी टी सिंह

कोरोना हेतु रचना प्रेषित है. डरा डरा सा मुंबईकर थमने वाली मुंबई मेरी आज रुकी रुकी सी दिखती है आतंकी हमला सुनामी दंगे फसाद से जो ना थमती है आज डरा डरा सा हर मुंबईकर अपने ही घरों में... Read more »

क़ुदरत, इंसान और कोरोना – मनित कुमार ( मीत )

“””क़ुदरत, इंसान और कोरोना “”” ज़रा सी कैद में तुम्हे घुटन होने लगी, मैंने देखा है कि तुम पँछी पालने के शौकीन हो । यूंही हवाएं जहरीली नही होने लगी, क़ुदरत के कत्ल में तुम सब... Read more »

मैं चली जाऊँगी मेरा विश्वास करोना – वैष्णो खत्री ‘ वेदिका ‘

मैं चली जाऊँगी मेरा विश्वास करोना कुछ दिन मित्रों व रिश्तेदारों के साथ बात न करके फोन पर बात करोना मैं चली जाऊँगी मेरा विश्वास करोना कुछ दिन बाहर घूमने मत जाओ तुम स्थिति सामान्य होगी इंतज़ार... Read more »

कोरोना – प्रिया रॉय

चारों और काला साया है मानव के अंत करण में छाया है नहीं कोई उच्च ना कोई नीच आज बैठे हैं सब भय के बीच हमारी आज की शिक्षा आज मांग रही है भिक्षा यह कैसी आज फैली... Read more »

रंग – इन्दिरा कुमारी

आओ सखी तुझे रंग लगा दूं स्नेह घोल तुझे भंग पिला दूं। इस रंग की महिमा अजब है प्रकृति में संगम गज़ब है इससे अब परिचित करा दूं आओ सखी तुझे रंग लगा दूं स्नेह घोल अब भंग... Read more »

तस्मै श्री गुरवे नमः – दीपक अनंत राव “अंशुमान”

                            मनुष्य की पहचान उनकी सांस्कृतिक घरातल पर၊कुच्छ करना,करके दिखाना उस परआदमी का ध्येय भी रहता है၊नामोनिशान करके,समाज के दिल कोजो जीता है,वह महान कहलाता हैं၊शिला युग… Read more »

गुरुदेव – सूर्य प्रकाश उपाध्याय

हे यतिवर शत्-शत् प्रणाम! काषाय वस्त्र त्रिदण्ड धरे, यज्ञोपवित शोभित कृशतन। कर वाम कमण्डल राजत है, अमृत बिखेरता कमल नयन। बैठे रसाल तरु के तल में, पर्णशाल पुष्प दल से मण्डित। सब वेद, शास्र,उपनिषद तापसे,... Read more »

गुरू – डॉ अमित कुमार दीक्षित

उप विषय – दीप से दीप जले ‘दीप से दीप’ जले गुरूदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की एक लोक प्रसिद्ध उक्ति है । गुरूदेव ने शिक्षकों के संदर्भ इस उक्ति का प्रयोग किया था ।... Read more »

गुरु – इन्दिरा कुमारी

कर गुरु प्रणाम शिक्षक दिवस पर सर हम झुकाऐं गुरु बड़े गोविन्द से बारंबार दुहराऐं। श्री राधाकृष्णन जन्मदिवस पर शिक्षक दिवस मनाऐं पाँच सितम्बर है शुभ अवसर सुन्दर सुयश बनाऐं। कर्मभूमि पर... Read more »

शिक्षक – किरण बाला

पूछूं गर मैं एक सवाल कौन हूँ मैं, क्या है मेरी पहचान? खो चुका हूँ अपना अस्तित्व भूल चुका हूँ अपना नाम क्या हूँ मैं कोई कठपुतली? या फिर हूँ मैं कोई फिरकी किसी खेल का हूँ मैं... Read more »