लाॅकडाऊन के क्या नुकसान – सुनील शुक्ला

लाॅकडाऊन के क्या नुकसान। चीन के वुहान शहर में जन्मे कोरोना नामक एक अदृष्य विषाणु द्वारा दुनिया में फैली महामारी से , भारत भी अछूता नहीं रहा। तेजी से मनुष्यों में फैलने वाले इस... Read more »

कोरोना पर कविता एक प्रण – अजय कुमार पाण्डेय

कोरोना पर कविता एक प्रण कैसा पल आया जीवन में हाहाकार मचा जन जन में अदृश्य शत्रु के व्यवहारों से व्याकुलता मची त्रिभुवन में। आओ हम प्रतिकार करें अनुदेशों को अंगीकार करें अदृश्य भयावह इस शत्रु से राष्ट्र रक्षण का… Read more »

कोरोना – डॉ बी.निर्मला

कविता: कोरोना चीन के वुहान शहर से निकलकर इटली,अमेरिका,स्पेन,जर्मनी,ईरानअब सारे विश्व में अपना भयानक रूप है दिखाती,महामारी कोरोना। ये कैसा वायरस,बीमारी है जिसने पूरी दुनिया में एकाएक तहलका मचा दिया और हजारों मनुष्यों को... Read more »

हार जायेगा कोरोना – गौरव सिंह घाणेराव

  हार जायेगा कोरोना राक्षशो का देश बना चीन,दया बिलकुल भी करी ना सुख,चैन देखो गया छीन,जैसी करी वैसी ही भरी ना निर्दयी बन जिन्दे जीव खाये,अक्ल भी घास चरी ना खुद तो डूबा कोरोना से पर... Read more »

कोरोना – राखी टी सिंह

कोरोना हेतु रचना प्रेषित है. डरा डरा सा मुंबईकर थमने वाली मुंबई मेरी आज रुकी रुकी सी दिखती है आतंकी हमला सुनामी दंगे फसाद से जो ना थमती है आज डरा डरा सा हर मुंबईकर अपने ही घरों में... Read more »

क़ुदरत, इंसान और कोरोना – मनित कुमार ( मीत )

“””क़ुदरत, इंसान और कोरोना “”” ज़रा सी कैद में तुम्हे घुटन होने लगी, मैंने देखा है कि तुम पँछी पालने के शौकीन हो । यूंही हवाएं जहरीली नही होने लगी, क़ुदरत के कत्ल में तुम सब... Read more »

मैं चली जाऊँगी मेरा विश्वास करोना – वैष्णो खत्री ‘ वेदिका ‘

मैं चली जाऊँगी मेरा विश्वास करोना कुछ दिन मित्रों व रिश्तेदारों के साथ बात न करके फोन पर बात करोना मैं चली जाऊँगी मेरा विश्वास करोना कुछ दिन बाहर घूमने मत जाओ तुम स्थिति सामान्य होगी इंतज़ार... Read more »

कोरोना – प्रिया रॉय

चारों और काला साया है मानव के अंत करण में छाया है नहीं कोई उच्च ना कोई नीच आज बैठे हैं सब भय के बीच हमारी आज की शिक्षा आज मांग रही है भिक्षा यह कैसी आज फैली... Read more »

रंग – इन्दिरा कुमारी

आओ सखी तुझे रंग लगा दूं स्नेह घोल तुझे भंग पिला दूं। इस रंग की महिमा अजब है प्रकृति में संगम गज़ब है इससे अब परिचित करा दूं आओ सखी तुझे रंग लगा दूं स्नेह घोल अब भंग... Read more »

तस्मै श्री गुरवे नमः – दीपक अनंत राव “अंशुमान”

                            मनुष्य की पहचान उनकी सांस्कृतिक घरातल पर၊कुच्छ करना,करके दिखाना उस परआदमी का ध्येय भी रहता है၊नामोनिशान करके,समाज के दिल कोजो जीता है,वह महान कहलाता हैं၊शिला युग… Read more »