किताब समीक्षाः दक्षिणपंथ के मध्यमार्गी अटल

किताब समीक्षाः दक्षिणपंथ के मध्यमार्गी अटल
अटल पर जनता सरकार के अनुभव का ही प्रभाव पड़ा कि उन्होंने 1980 में बनी नई पार्टी बीजेपी के सिद्धांतों में गांधीवादी समाजवाद और सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता को शामिल करने पर जोर दिया. हालांकि जिस वक्त अपने पुराने अवतार, जनसंघ के… Read more ›

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में होली

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में होली
डॉ. उर्मिला पोरवाल सेठिया (बेंगलुरु) होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है क्योंकि उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से जगह जगह पर परंपरानुसार फाग और धमार के गीत गाना प्रारंभ हो… Read more ›

यदि तुम चाहो – रश्मि प्रभा

यदि तुम चाहो – रश्मि प्रभा
बैठो कुछ खामोशियाँ मैं तुम्हें देना चाहती हूँ वो खामोशियाँ जो मेरे भीतर के शोर में जीवन का आह्वान करती रहीं ताकि तुम मेरे शोर को पहचान सको अपने भीतर के शोर को अनसुना कर सको ! जन्म से लेकर… Read more ›

15 अगस्त 1947 को भारत की धरती से अंग्रेजों का राज्य समाप्त हो गया।

15 अगस्त 1947 को भारत की धरती से अंग्रेजों का राज्य समाप्त हो गया।
डॉ.उर्मिला पोरवाल “सेठिया” (बैंगलोर) 15 अगस्त 1947 को भारत की धरती से अंग्रेजों का राज्य समाप्त हो गया। यानि गोरे अपने इंग्लैण्ड वापस चले गये और देश पर अपने ही देशवासियों का शासन हो गया था। उस समय चारों ओर… Read more ›

तलाक़ तलाक़ तलाक़……

तलाक़ तलाक़ तलाक़……
(रेखा जसोरिया) मैं इसे नसीब कहूँ ,या कहूँ इत्तेफ़ाक… ना बन सकी उससे तो कह दिया तलाक़ तलाक़ तलाक़…… मैने हर लम्हा जिसे चाहा, जिसे दिल में रखा… जिसका रस्ता मैने हर शाम उम्मीदों से तका….. जिसकी खा़तिर मैं होती… Read more ›

महापर्व शिवरात्रि विशेष – सेठिया

महापर्व शिवरात्रि विशेष – सेठिया
प्रो उर्मिला पोरवाल सेठिया ( बैंगलोर )महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है।शिव जिनसे योग परंपरा की शुरुआत मानी जाती है को आदि (प्रथम) गुरु माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस रात… Read more ›

महासंग्राम के अध्याय

महासंग्राम के अध्याय
जीती हो बाज़ी जब आपने, अभी अभी एक, महासंग्राम का अध्याय एक, दिया हो हस्ती का प्रमाण अपना, किया हो साबित अपने हिस्से का सच, फिर छेड़ जाये जंग कोई, कहकर ढेर सारे अनर्गल, कि फिलहाल हस्ती आपकी यहाँ है,… Read more ›

और कब तक

और कब तक
एक सुबह जब सूरज जागा दंग रह गया देख अभागा अंधियारे का लिये सहारा किसने वीर सपूत को मारा कैसे रचता धोखे का जाल जान न पाए रहा मलाल कितना सब्र है आज़माना देख रहा है सारा ज़माना तोड़ो सीमा… Read more ›

सीख लेना

सीख लेना
घूरा को घूरो और सीख लो तब का ज़माना ये नहीं था कि द्वारे द्वारे सीटी बजे और घर से कूड़ेदान बाहर रखा जाये ….. तब हर घर के थोड़ी दुरी पर बड़ा गढ़ा खोद कर रखा जाता था और… Read more ›

वक्त वक्त की टेर

वक्त वक्त की टेर
काअ हो तहरा घरे सभन चाचा लोगन के अलग अलग न्योता के कार्ड जाई नु ना ना हमरा घरे ऐ गो कार्ड जाई काहेए ….. जब हम तहरा भाई के शादी में अलग न्योता भेजनी अउरी तहरा चचेरा भाई बहीन… Read more ›