कविता-प्रिया वच्छानी

कविता-प्रिया वच्छानी
सुनानी नहीं मुझे दास्ताँ कोई अपनी बस इतनी सी तो मेरी ये कहानी है होते हैं जिन पलों में साथ हम और तुम बस उन्ही पलो में बसती मेरी ज़िंदगानी है कुछ पलो का सुकून हुआ है हासिल और चंद… Read more ›

बिहारनामचा – सुधा राजे

बिहारनामचा – सुधा राजे
हिन्दू बौद्ध ईसाई और मुसलिम इन सबके इतिहास से बहुत पीछे बहुत गहराई से जुङा है बिहार । कभी भारत का गौरव रहा बिहार इतना पीछे धकेला गया कि आज बिहार के बाहर “उँह बिहारी “कहकर बहुत हेयता से दूसरे… Read more ›

ग़ज़ल – ख़ान बदरे आलम

ग़ज़ल – ख़ान बदरे आलम
बेटियाँ लाती है दामन में भरकर रहमत और बरकत की झोली ये मासूम फूलों के साथ फिर क्यू लोग खेलते है खून की होली मार  डालते है कभी माँ की कोख में तो कभी दहेज़ की खातिर सरे आम  घूमते… Read more ›

दंश – विभा रानी

दंश – विभा रानी
कलियाँ खिली ब्याही सुता हो जाती स्व समर्पित एक ब्याहता स्वयं समर्पण करती है ….. बलात्कृत तो कली कुचली जाती है …… खिलती नहीं परिवार में लड़की अगर सुरक्षित नहीं तो परिवार की जरूरत ही नहीं हम फिर इतिहास दोहराएंगे… Read more ›

वो अनुभव – प्रीति पुरी

वो  अनुभव – प्रीति पुरी
वो  अनुभव जो मैंने महसूस किया …… जब हमारी १२कक्षा से विदाई हो रही थीं उसी दौरान मैंने अपने विचारों को पहली बार सभी के समुख लिखकर सभी का  अभिनन्दन किया उस वक्त एक ऐसी हलचल चल रही थी कि… Read more ›

उड़ेगी बिटिया

उड़ेगी बिटिया
बात बहुत पुरानी है ….. पर लिखना जरूरी है …..  तब हम रक्सौल में रहते थे ….. मेरे ससुर जी व्यापार मंडल के मैनेजर और मेरे बड़े भैया की सिंचाई विभाग में इंजीनियर की नौकरी वहाँ थी …… बड़े भैया… Read more ›

जिन्दगी के नाम

जिन्दगी के नाम
एक छोटा सा अनुभव”जिन्दगी के नाम” जिन्दगी बड़ी अजीब है,हम चाहते क्या है होता कुछ है। हम सोचते कुछ है,निकलता कुछ है, जाना कहा है,चले कहीं जाते हैं बनना कुछ चाहते है,बन कुछ ओर जाते हैं। जिन्दगी है बड़ी बेमिसाल… Read more ›

हाइकु

हाइकु
हाइकु  एक बहुत छोटी जापानी विधा में लिखी जाने वाली कविता है. इसके तीन गुण है * जिसे हाइकु की जान या मुख्य गुण कहा गया है वह “किरे” , कटाई है (अँग्रेज़िमे cut, जापानिमे kiru या kire) जो दो… Read more ›

कलाम — पुष्प

कलाम — पुष्प
भारत रत्न उपलब्धि है जिन दियो पूत कलाम गुण विशेष जन हित में ऐसे विशेषज्ञ सलाम।। जाति -पाति से होत न कुछ होत है कर्म सम्मान औरन के सुख देत जो वही धरम महान।। पुष्पा त्रिपाठी ‘पुष्प ‘ Share on:… Read more ›

वो सुबह फिर तो अायगी – अरुणा

वो सुबह फिर तो अायगी – अरुणा
उम्मीद की कलम से, संध्या के दामन पर ,सात रंगों से सूर्योदय की बात लिखा उसने,——- तो देखते ही, सितारों की चुनरी पहने ,चाँद का टिक्का लगाये आसमां —— मुस्कुराते हुए झुका धरती को चूमने और धीरे से बुदबुदाया उसके… Read more ›