प्यार तो है – शिवानी

प्यार तो है – शिवानी
प्यार तो है उसे भी शायद चुपचाप देखा करता है…. पहले बोलता था अब खामोशी का वार किया करता है… राह में हर मोड़ पे मिलता तो है पर अनजान बना करता है… जितनी कहती हूं मन की बात उड़ा… Read more ›

हिम्मत मत हार तूँ

हिम्मत मत हार तूँ
हिम्मत मत हार तूँ, होगी हार, किस्मत में तेरी, पर, खुद पर कर, विश्वास तूँ। पंछी उड़ते, हिम्मत से खुद की, भले किस्मत ने दिए, डैने उनको। आगे बढ़, करले मुट्ठी मे, ये जहान तूँ, हिम्मत मत हार तूँ। नन्हीँ… Read more ›

प्यासी जल में सीपी

प्यासी जल में सीपी
प्यासी जल में सीपी भूल जाओ पुरानी बातें ……. माफ़ कर दो सबको ….. माफ़ करने वाला महान होता है …… सबके झुके सर देखो ….. बार बार बड़े भैया बोले जा रहे थे ….. बड़े भैया की बातें जैसे… Read more ›

बकबक

बकबक
जले दीप को गर्म चाय प्याली को कौतुक में स्पर्श को धैर्य स्व माँ को डुबो दी ऊँगली को सीख देने शिशु को ~~~ दो कदम पीछे हट कर ज्यूँ छलांग भरते हैं तो अविवेकी की पहचान क्रोधी हाँ तो… Read more ›

कश्मीर – कितना अंतर आ गया कल और आज में

कश्मीर – कितना अंतर आ गया कल और आज में
कश्मीर :- कल कभी स्वर्ग था जो धरती पर, खुशी जहाँ लहराती थी, प्रकृति अपना वैभव जिसपे, दोनों हाथ लुटाती थी, हजरतबल और अमरनाथ को, एक सा आदर मिलता था, पुष्प शांति का और सौहार्द का, जिसके मुकुट में खिलता… Read more ›

पुराने ख़त -नीलिमा शर्मा निविया

पुराने ख़त -नीलिमा शर्मा निविया
पुराने ख़त आज सुबह से व्यस्त हूँ पुरानी अलमारी में रखे खतो को संजोने में कितनी खुशबुए मेरे इर्द गिर्द सम्मोहित कर रही हैं मुझे वोह प्यार का पहला ख़त मुझे मिलने के बाद पहली ही रात को लिखा और… Read more ›

वर्ण पिरामिड – विभा

वर्ण पिरामिड – विभा
जी नन्हीं नीड़ में संवर्धक मनु सीखाते तंगी में कुंजन चिड़िया व पिण्डज ~~~ हे ! मन अन्दोरी अवीक्षित न होड़ी बन लाज से बचेगी उर्मियाँ क्या हारेगी ~~~ तू चप्पू चंपला चमकौवल चभोरे नाव छेड़े शशि छवि हिलोरे धारा… Read more ›

कविता-प्रिया वच्छानी

कविता-प्रिया वच्छानी
सुनानी नहीं मुझे दास्ताँ कोई अपनी बस इतनी सी तो मेरी ये कहानी है होते हैं जिन पलों में साथ हम और तुम बस उन्ही पलो में बसती मेरी ज़िंदगानी है कुछ पलो का सुकून हुआ है हासिल और चंद… Read more ›

बिहारनामचा – सुधा राजे

बिहारनामचा – सुधा राजे
हिन्दू बौद्ध ईसाई और मुसलिम इन सबके इतिहास से बहुत पीछे बहुत गहराई से जुङा है बिहार । कभी भारत का गौरव रहा बिहार इतना पीछे धकेला गया कि आज बिहार के बाहर “उँह बिहारी “कहकर बहुत हेयता से दूसरे… Read more ›

ग़ज़ल – ख़ान बदरे आलम

ग़ज़ल – ख़ान बदरे आलम
बेटियाँ लाती है दामन में भरकर रहमत और बरकत की झोली ये मासूम फूलों के साथ फिर क्यू लोग खेलते है खून की होली मार  डालते है कभी माँ की कोख में तो कभी दहेज़ की खातिर सरे आम  घूमते… Read more ›