गुरु से शिक्षा प्रदाता बने शिक्षक का दिवस

गुरु से शिक्षा प्रदाता बने शिक्षक का दिवस
शिक्षक दिवस है तो वातावरण में ‘गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागू पाय‘ से ‘शिक्षक राष्ट्र निर्माता है’, ‘युग निर्माता है’ की सुगंध होगी लेकिन इस शब्दजाल और नारों के प्रवाह में बहने से पहले यह समझना जरूरी है कि… Read more ›

नन्हें हाथों ने किए कमाल के रँग

नन्हें हाथों ने किए कमाल के रँग
दिल्ली। बाल रचनाकारों की राश्ट्रीय पत्रिका ‘अभिनव बालमन’ द्वारा हडसन लाइन स्थित लर्नर्स कासल स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता ‘मेरा मन मेरे रंग’ का आयोजन किया गया। इसमें प्ले वे के बाल रचनाकारों ने अपने नन्हे-नन्हे हाथों से चित्रों में रंग… Read more ›

केवल आदिवासी ही भारत के मूलवासी हैं।

केवल आदिवासी ही भारत के मूलवासी हैं।
  डॉ. पुरुषोत्तम मीणा (निरंकुश) हमारे कुछ मित्र दिन-रात “जय मूलनिवासी” और “मूलनिवासी जिंदाबाद” की रट लगाते नहीं थकते। बिना यह जाने और समझे कि मूलनिवासी का मतलब क्या होता है? साथ ही भारत के 85 फीसदी लोगों को भारत… Read more ›

व्यंग्य-जलवा तो प्रधानपतियों का है, जनाब!

व्यंग्य-जलवा तो प्रधानपतियों का है, जनाब!
(एम. अफसर खां सागर) प्रधानपति… प्रधानपति…. प्रधानपति। मेरे एक अविवाहित मित्र वर्मा जी अल्सुबह कुछ इसी तरह बढ़बढ़ाते हुए मेरे घर आ धमके। मुझसे रहा न गया, मैने पूछ ही दिया अरे भई आखिर माजरा क्या है? ये क्या बके… Read more ›

नारी-रत्नः एक गौरव गाथा

नारी-रत्नः एक गौरव गाथा
दिनांक, 15 नवंबर, 2015 नॉन कॉलिजिएट वुमन एजुकेशन बोर्ड, दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज शिक्षण केन्द्र पर ̒ नारी-रत्नः एक गौरव गाथा 2015̕ विषय पर कार्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम में प्रथम वर्ष की छात्राओं ने भारतीय संस्कृति के प्रमुख… Read more ›

सोशल मीडिया में बदजुबान होती अभिव्यक्ति की आजादी

सोशल मीडिया में बदजुबान होती अभिव्यक्ति की आजादी
(एम. अफसर खां सागर) फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प सरीखे सोशल साइट्स ने वैश्विक स्तर पर लोगों को करीब आने का मौका दिया है तथा एक-दूसरे के विचारों और संस्कृति से परिचित भी कराया है। संचार का सदव्यवहार संवाद और संस्कृतियों के… Read more ›