मिड-डे-मील से आगे ले जाना होगा प्राथमिक शिक्षा को

(एम. अफसर खां सागर)  शिक्षा किसी भी समाज की तरक्की और खुशहाली के लिए बहुत जरूरी है। सभ्य समाज का निमार्ण शिक्षा के बिना मुम्किन नहीं है। तमाम कवायदों के बावजूद आजादी के... Read more »

पत्रकार के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए लामबंद हुए पत्रकार

महापंचायत कर भरा हुंकार, जल्द गिरफ़्तारी और 20 लाख की आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी की मांग चन्दौली। मुगलसराय स्थित अग्रवाल सेवा संस्थान में जिले के पत्रकारो की एक महापंचायत आयोजित की गयी।... Read more »

पुस्तक समीक्षा-पारम्परिक मूल्यों का यथार्थ चिन्तन

(एम. अफसर खां सागर)  पुस्तक- हृदयनारायण दीक्षित और उनकी पत्रकारिता (शोध ग्रन्थ), लेखक- डा0 अनुभव अवस्थी प्रकाशक- पुस्तक पथ, साकेत नगर, वाराणसी, मूल्य- 350 रूपये (पेपर बैक)। पत्रकारिता में अनेकों प्रशंसनीय शोध हुए हैं, इन शोधों... Read more »

संगीत पर… हंगामा है क्यों बरपा?

(एम. अफसर खां सागर) संगीत, साहित्य और कला ने समाज को हमेशा से दिशा देकर एकता और सौहार्द के मखमली डोर में पिरोने का काम किया है। संगीत को सरहदों में कैद नहीं... Read more »

श्राद्ध

आज अंतिम दिन पितृपक्ष का कल से नवरात्र शुरू जान में जान हो जाने में राह आसान हो जान लें जाना कहाँ है जाने से पहले आत्मतृप्ति के बाद आत्मा तृप्ति की जरूरत नहीं होती  तीन में कि... Read more »

लेन देन की रिवाज – पुष्पा

लेन देन की रिवाज … पहले तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ फिर उच्च तालिम के बाद दहेज़ तो जरूर दो, लो और ब्याह करवाओ उम्र की गाढ़ी कमाई से इसके बाद भी इसकी कोई गारंटी नहीं बेटी सुखी रहेगी या… Read more »

गुर्राना सही वक़्त हो तो

बनना नहीं किसी की देवी  बनना नहीं किसी की दासी  भुलाना नहीं तुम हो जननी जगतजननी रूपा  भुलाना नहीं अपने जज्बातों को  निभाना अपने चुने रिश्तों को  निभाना अपने मिले दायित्वों को  डरना नहीं दहलीज़ पार की तो  डरना नहीं… Read more »

डेंगू से बचाव और रोकथाम में निगम फिसड्डी

-संवाददाता नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम स्थायी समिति की बैठक में डेंगू को लेकर सभी सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है। निगम शासित भाजपा पर हमला बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष मुकेश गोयल ने कहा कि डेंगू से बचाव... Read more »

एकता का सूत्र हिन्दी

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।। यानी अपनी भाषा से ही उन्नति सम्भव है, यही सारी उन्नतियों का मूलाधार है। भाषा के ज्ञान... Read more »

व्यंग — फेसबुकी बौझार

(शशि  पुरवार ) आजकल व्यंग विधा अच्छा खासी प्रचलित हो गयी है. व्यंगकारों ने अपने व्यंग का ऐसा रायता फैलाया है, कि बड़े बड़े व्यंगकार हक्के बक्के रह गए, अचानक इतने सारे... Read more »