दामिनी की अंतिम इच्छा

geett
 

 

 

 

 

 

मैं जा रही हु सबको छोड़कर ,सबकी आँखों में आंसू भिगोकर ,

नहीं पता था ऐसा वक्त आएगा ,इन दरिंदों के हत्थे चढ़ जाउंगी,

कह देना माँ से ,मत बहाएं आंसू ,

तेरी दामिनी जिन्दा है ,इस धरती पर नहीं तो ,आसमान पर परिंदा है,

माफ़ करना पापा,मैं छौड़ चली इस दुनिया को ,

जब कन्यादान का वक़्त आया,

मत रोना भाई ,तेरी ही बहना हु,

अपनी कलाई पर जरुर बांधना धागा,

हर माँ-बाप की इच्छा होती है कन्यादान ,

पर मैं न कर सकी आपका पूरा अरमान,

मैं जीना चाहती थी ,मेरी यही थी ख्हवाहिश पर ,

न दिया किस्मत ने साथ,

बस चली इस दुनिया से ,दरिंदों ने किया बुरा हाल ,

उन्हें सजा दिलवाने के पूरा है अधिकार ,

न हो किसी और बेटी का मुझ जैसा हाल,

नहीं सह पायेगी इन दरिंदों का अत्याचार ,

मेरे अंतिम इच्छा पूरा करना है आपका अधिकार ,

दिलाना इन दरिंदों को कड़ी सजा अपनी इच्छानुसार ।

(गीता गाबा )