दुर्भाग्य-सी, हस्त-रेखाएँ

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ff

“जेहन-में,
किसी-के,
दिशाएं, नई हैं!

 तो, आकुल-कोई,
लिए, हस्त-में,
रेखाएँ, कई हैं!

हैं-मिलते, पँख उन्हें,
सफल-उड़ान, जो,
आत्मबल-की चाहते!

शेष, दिखे, हाथों-में,
भाग्य-की, विफल-लकीरें,
जीवनपर्यन्त-तलाशते!!”____दुर्गेश वर्मा


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