मंत्रियों के खर्चों में भी कटौती हो

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी खर्चों में कटौती के लिए जो कदम
उठाए हैं वे अच्छे उपाय हैं। खर्च के बारे में इस तरह की जागरूकता होनी
ही चाहिए। इस प्रकार के तरीकों से नौकरशाही को अभिप्रेरित किया जा रहा
है, एक जिम्मेदारी का भाव पैदा किया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के माध्यम
से जिस तरह से आम जन मंे जिम्मेदारी का भाव पैदा किया
गया है, उसी प्रकार का स्व जिम्मेदारी भाव अब खर्चे के
विषय में नौकरशाही में जगाने की कोशिश की जा रही है
पर यह जरूरी नहीं, यह तो अनिवार्य होना चाहिए।
एक ओर केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार
खर्चों में कटौती कर रही है, वहीं हरियाणा और महाराष्ट्र में
भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने बड़े सार्वजनिक
कार्यक्रमों में शपथ ग्रहण की। भले ही भाजपा कुछ करोड़ का खर्चा बता रही
हो लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भव्य कार्यक्रमों से केंद्र सरकार के
मिव्ययता के संदेश को धक्का लगता है। सिर्फ नौकरशाही के लिए ही खर्चों
में कटौती का शिकंजा क्यों ? मंत्रियों के ऊपर भी यह अनिवार्य रूप से लागू
किया जाना चाहिए।
सरकार को मंत्रियों के खर्चों में भी कटौती की दिशा में सोचना चाहिए।
अक्टूबर महीने में एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सरकार से प्राप्त सूचना में
पता चला था कि मोदी सरकार के नवनिर्वाचित 106 सांसद आईटीडीसी के
सम्राट होटल, जनपथ और अशोका होटल जैसे फाइव स्टार होटलों में रह रहे
थे। सांसदों को इन होटलों में ठहराने का खर्च ही प्रतिमाह लगभग 2.5 लाख
रूपए था। अच्छा होता कि सरकार शुरू से ही ऐसी बातों पर ध्यान देती।
हां, मोदी सरकार ने एक अच्छा फैसला किया है कि मंत्राी पद पर रहे
लोगों को मृत्यु या पद छोड़ने के बाद बड़ा घर छोड़ना पड़ेगा। नेताओं की
बीवियों और बच्चों को अब दिल्ली में मिले आलीशान मकान स्मारक के नाम
से नहीं मिलेंगे।बहुत से नेताओं ने दिल्ली के आलीशान बंगलों पर कब्जा कर
रखा है और कुछ में अब तीसरी पीढ़ी रह रही है। अभी हाल ही में चौधरी चरण
सिंह के पुत्र, पूर्व मंत्री अजीत सिंह से मकान खाली करवाया गया तो जम कर
हल्ला हुआ पर सरकार अड़ी रही। पद पर काम करने के लिए दिया गया
मकान तब एकदम खाली हो जाना चाहिए जब व्यक्ति पद पर न रहे। असल
में बुद्धिमानी तो यही है कि पदासीन व्यक्ति की पत्नी नए घर में जाने से इंकार
कर दे क्योंकि नेताओं के पद कब छिन जाएं, पता नहीं। उसे तो पति से कहना
चाहिए कि चाहे छोटा हो, अपना या किराए का मकान लो जो पद जाने के
बाद खाली न करना पड़े। स्मारक के नाम पर बड़े मकान का आनंद पीढि़यों
भोगना तो और भी गलत है। मायावती ने अच्छा किया कि उन्होंने जैसे-तैसे
दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में अपना मकान पार्टी के चंदे से बनवा कर उसे
गैर सरकारी स्मारक का नाम दे दिया और जब जी चाहे तो वे वहां रह सकती
हैं। सभी को यही करना चाहिए। मोदी सरकार को नौकरशाहों की प्रथम दर्जे
की हवाई यात्रा, फाइव स्टार होटलों में सेमिनार व कांफ्रेंस करने और नए
वाहनों की खरीद पर रोक लगाने के साथ ही साथ मंत्रियों की ऐसी गतिविधियों
पर भी ध्यान देना होगा हालांकि प्रधानमंत्री ने सरकार के गठन के साथ ही
मंत्रियों को विदेश यात्रा के दौरान बेवजह की भीड़ को अपने साथ ले जाने से
बचने की सलाह दे रखी है। अच्छा होता कि वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री सिर्फ
इस वित्त वर्ष के दौरान ही नहीं, सदैव के लिए नौकरशाहों और मंत्रियों की
प्रथम श्रेणी यात्रा पर रोक लगा दें। वह घोषणा करें कि आगे से कोई भी अफसर
या मंत्री प्रथम दर्जे और बिजनेस क्लास की यात्रा नहीं करेगा और उन्हें भी
आम जनता के साथ साधारण श्रेणी की ही यात्रा करनी पड़ेगी। इससे जनता
में न केवल सरकार के प्रति सम्मान और बढ़ेगा बल्कि खर्चे में कटौती भी हो
सकेगी।


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