इनायत: कविता और संगीत में घुली एक ऐसी शाम, जिससे पंजाब की मिट्टी की ख़ुशबू उठेगी।

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इनायत: कविता और संगीत में घुली एक ऐसी शाम, जिससे पंजाब की मिट्टी की ख़ुशबू उठेगी। 2 घण्टे काव्यमयी-संगीतमय एक ऐसी आत्माभिव्यक्ति, जो श्रोताओं को आत्मानुभूति तक ले जाये ।
दिल्ली और पंजाब के कलाकारों का अनोखा मिश्रण जिसमें अंग्रेजी के स्पोकन वर्ड्स से लेकर हिंदी/उर्दू/पंजाबी शेरो-शायरी, गायन -वादन और समाज पर परिचर्चा, सबकुछ एक साथ श्रोताओं को समर्पित है।

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बिक्रम बुमराह, पंजाब द पुत्तर, सरहद के दोनों तरफ़ नौजवानों की प्रेरणा। कुदरत और कायनात दोनों इनकी कविता में मानवीय संवेदना का रूप ले लेती हैं।
बचपन से ही काव्य में अभिरुचि, मार्च 2017 में मुम्बई से मंच पर पदार्पण, मुशायरों और महाविद्यालयों में इनका गीत ‘जाम’ युवाओं में प्यार का जोश भरता रहा है। युवा मन की चंचलता और जड़ो से जुड़ाव, इनकी कविता का स्त्रोत है साथ ही श्रोताओं की जीवन-उमंग का भी।

ग़ज़ल खन्ना, स्याही अनबॉक्स की संस्थापक। स्पोकन वर्ड्स प्रारूप की जीवंत लेखिका, साथ ही अपने ब्लॉग पर पुस्तकों की समालोचक भी हैं। अनकहे को कहना इनके लिए ज़िम्मेदारी की तरह है, इसलिए प्रेम और दुःख जैसे विषयों से दूरी बना के रखती हैं। शब्द ही इस दुनिया मे दिमाग़ी संतुलन को बनाये रखते हैं, किताबों, पन्नों, स्याही और हर्फ़ों में ख़ुद का अक्स तलाशती हुई यह ग़ज़ल ख़ुद के इस विश्वास का ख़ुद ही सबूत है।

नवीन चौरे, अभिनय करते हुए एक लेखक है और लिखते हुए एक अभिनेता। अपने अस्तित्व में बिखरता हुए इस प्राणी को कविता ने बाँध रखा है, कविता ही उसे सम्पूर्ण करती है, इसलिए ख़ुद को मुकम्मल कहता है।

मोहित ‘रुद्र’ शर्मा, आर्टिस्टिकली ऑडेसिअस इनकी दिमाग़ी उपज है, दिल्ली में लेखकों-कलाकारों के लिए एक ऐसा मंच जहाँ साहित्य सर्वोपरि का नारा सदा गुंजायमान रहता है।
अपने अवसाद से लड़ने के लिए जो कलम इन्होंने उठाई थी, वो अब सामाजिक कुरीतियों पर तलवार बन कर टूट रही है। साहित्य से समाज सेवा इनका लक्ष्य है।

दीप्ति नेगी, एक संगीतकार, एक गीतकार, गिटारवादक, संगीतज्ञ और भी न जाने क्या- क्या? इनके जितना हुनर एक शरीर में होना अपने आप मे आश्चयजनक है। कई गाने लिख चुकी है, उन्हें ख़ुद ही धुन में पिरोया है। बॉलीगार्ड फिल्म्स एंड टेलीविश्ज़न की अभिन्न संगीतकार हैं, दिल्ली के कई मंच इनकी प्रस्तुति से अभिभूत हो चुके हैं। इनकी प्रतिभा देखकर इन्हें कला का मूर्त रूप कहना अतिश्योक्ति नहीं लगता।

प्रभमनत सिंधु, अमृतसर का ‘वायलिन सिंह’ । पिछले 14 साल से इनके दिल के तार वायलिन में बँधे हुए हैं, जिसकी मधुर धुने अब पंजाब के बाहर निकल कर पूरे देश मे फैल रही हैं। वायलिन की दर्द भरी आवाज़ से ख़ुशी का संगीत निकालना इनकी ख़ूबी है। रुढ़िवादिता को तोड़ती इनकी धुनें संगीत के नए आयामों की खोज में हैं।

 

 

 


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