क्षमादान – जौली अंकल

JU - 11

क्लास मे साथ पढ़ने वाली लड़की ने विकास को गुस्सा करते हुए कहा, कि बार-बार मेरी तरफ क्या देख रहे हो? तुम्हारे घर में कोई बहन नही है क्या? उस  लड़की को और तंग करते हुए विकास ने कहा कि बिल्कुल है, इसीलिये तो देख रहा हॅू। तुझे सच्ची बात बता दू कि मेरी बहन को एक सुंदर सी भाभी चाहिये,  बस इसीलिये तुम्हें देख रहा हॅू। तुम्हें कई बार समझा चुकी हॅू कि इस तरह की हरकते छोड़ दो वरना जिस दिन मेरे घरवालों को यह सब मालूम हो गया उस  दिन अच्छा नही होगा, लड़की ने चेतावनी देते हुए कहा। इतने में टीचर क्लास में दाखिल हुए और छात्रों को ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के बारे में पढ़ाना षुरू  कर दिया। सभी छात्रों को इस विशय के बारे में समझाते हुए टीचर ने उनसे पूछा कि क्या आपमें से किसी ने बिना पानी के जीने की कला सीख ली है। यदि  हा, तो हमें भी बताऐं ताकि हम दूसरें लोगो को भी पानी के बिना जीना सिखा सके। टीचर ने विद्याथिर्यों से आगे कहा, कि बहुत जल्द एक दिन ऐसा आयेगा जब पृथ्वी पर पानी की एक बूंद भी नही रहेगी। सारे जीव-जन्तु नश्ट हो जायेगे, पृथ्वी की हर चीज खत्म हो जायेगी। यह बात सुनते ही षरारती विकास ने कहा टीचर जी, यह तो बता दो कि उस दिन कालेज आना है या नही। टीचर ने उससे कहा कि बेटा, तुम अपनी इन्ही हरकतों की वजह से पिछले कई सालों से पढ़ाई पूरी नही कर पा रहे हो। यह तुम्हारा कालेज में आखिरी साल है। कुछ समय के लिये गंभीरता से पढ़ाई कर लो फिर चाहे सारी उम्र मसखरी करते करना।
टीचर का मज़ाक उड़ाते हुए विकास ने कहा टीचर जी क्यूं मुझे बेवकूफ बना रहे हो। जो कुछ आप कह रहे हो वो मैं बरसों से सुनता आ रहा हॅू। मैं जब दसवीं में पढ़ता था तो मां कहती थी बस इस साल मेहनत कर ले फिर इसके बाद आराम करना। फिर जब ग्यारहवीं कक्षा में गया तो घरवालों ने कहना षुरू कर दिया कि बेटा दो साल दिल लगा कर पढ़ाई कर ले फिर हम तुझे कभी भी पढ़ने के लिये नही कहेगे। अब जिस दिन से कालेज में आया हॅू उस दिन से हर कोई मेरे पीछे पड़ा हुआ है कि एक बार कालेज की ड्रिगी ले ले फिर चाहे जितने मर्जी मजे करना। टीचर ने कहा, परंतु इसमें किसी ने कुछ भी गलत तो नही कहा। विकास वो तो मैं जानता हॅू कि सारी गलती तो हमारी ही होती है। मैं यह भी समझता हॅू कि जिस दिन कालेज की ड्रिगी मिल जायेगी उस दिन भी घरवाले आराम से कहां बैठने देगे। फिर वो लोग कहना षुरू कर देगे कि नालायक यहां बैठा आराम फरमा रहा है, जा उठ कुछ काम काज कर।
टीचर महोदय ने विकास से कहा कि अब अगर तुम एक अक्षर भी फालतू बोले तो मैं प्रिसीपल साहब से षिकायत करके तुम्हें आज ही कालेज से निकलवा दूंगा। विकास ने भी अपनी अक्कड़ कायम रखते हुए कहा कि यह धमकियां बहुत पुरानी हो चुकी है, अब कोई नई धमकी दो। आप क्या सोचते हो कि इस तरह की बातों से डर कर मैं अभी हाथ जौड़ कर माफी मांगने आ जाऊगा। अब टीचर से नही रूका गया और वो अंगारे उगलते हुए क्लास छोड़ कर सीधा प्रिंसीपल साहब के कमरे में जा पहुंचे। सारी कथा सुनाने के साथ टीचर ने कहा कि आज तो आपको मेरी षिकायत पर जरूर कोई कारवाई करनी पड़ेगी क्योंकि इस लड़के ने तो मेरे नाक में दम कर रखा है।
प्रिंसीपल साहब ने उस टीचर से कहा कि आपको तो मैं बहुत समय से जानता हॅू आपके मन में इससे पहले कभी भी इतनी द्वेश की भावना देखने को नही मिली। बल्कि आप को तो खुद कई बार दूसरे लोगो को यह राय देते देखा है कि इस तरह की भावना मन में रखने से यह हमें विनाष की और ले जाती है। प्रिंसीपल के इस व्यवहार से हैरान होकर टीचर ने कहा कि इस तरह से ऐसे बदतमीज छात्रों के हौसले तो और बुलंद हो जायेगे। यह लोग तो हमारा जीना दुष्वार कर देगे। टीचर को हिम्मत बंधाते हुए प्रिंसीपल साहब ने कहा कि आज पहले से ही हर तरफ मानसिक अषांति और तनाव का महौल है। ऐसे में यदि हम भी हर छात्र को सुधारने की बजाए उन्हें सजा देने लगेगे तो हम समाज का सुधार तो कभी हो ही नही पायेगा। एक बार मेरी बात मान लो और आप जिस प्रकार अपने बच्चो को प्यार करते हो, उनकी गलतियों को अनदेखा करके उन्हें क्षमा कर देते हो, उसी तरह आज इस लड़के को भी क्षमादान दे दो।
अब टीचर ने प्रिंसीपल से कहा कि आपको नही लगता कि इस व्यवहार से छात्र हमको कायर समझने लगेगे। प्रिंसीपल ने हंसते हुए कहा अगर कोई ऐसा सोचता है तो यह उसकी भूल है क्योंकि दृढ़ मनोबल के बिना कोई व्यक्ति किसी को क्षमादान दे ही नही सकता। आप एक बार क्षमादान देकर देखो तो सही, आप महसूस करोगे कि किसी को माफ करने से जो सुख मिलता है वो संसार में और कोई भी दूसरे कार्य करने से नही मिल सकता। मेरा अनुभव तो यह कहता है कि किसी भी छात्र की प्रतिभा को उसके स्कूल या कालेज की परीक्षा में मिलें अंकों से नही आंकना चाहिये। असल में हर छात्र की सच्ची प्रतिभा तो वह होती है जिस से वो अपने परिवार और समाज में दूसरों की इज्जत और सेवा करते है। प्रिंसीपल साहब की गहरी बातों को समझने के प्रयास में जौली अंकल इतना ही समझ पाये है कि किसी रिष्ते में चाहे कितनी ही कमिया क्यूं न हो उसे क्षमादान देने में देर नही करनी चाहिये क्योंकि इस संसार में क्षमादान से बढ़ कर कोई दूसरा दान है नही।