किसान आंदोलन – कुमार विनोद

कविता:- किसान आंदोलन

मैं अब भी अपने खेतों में काम कर रहा हूँ,
ये सड़कों पर ट्रेक्टर से जाम लगाने वाले कौन हैं|

मुझे तो फुर्सत नहीं फसलों की बुआई और कटाई से,
ये सरकार की MSP नीति पर बरगलाने वाले कौन हैं|

अब तक मेरे आत्महत्या करने पर इन्होंने शोक ना मनाया,
अब किसान आंदोलन के नाम पर ये शोर मचाते कौन हैं|

बातों से भी मसले हल हो जाया करते हैं,
बातों का बतंगड़ बनाने वाले ये सिपेह सालार कौन हैं|

मुझको तो कभी ये दिलासा देने आये नहीं,
अब आम जनता को ये भड़काने वाले कौन हैं|

ट्रेक्टर का काम खेतों में होता है साहब,
उस पर सोफे लगाकर रैली निकालने वाले कितने सारे द्रोण हैं|

आंदोलन के कुछ अपने कायदे कानून होतें हैं,
किसान आंदोलन को दंगे की शक्ल देने वाले कौन हैं|

सारा सच सामने है सबके देश दुनिया में हो रही है निंदा,
आंदोलन के नाम पर आतंकी नारे लगाने वाले कौन हैं|

चाहता हूँ कि मेरे घर और देश में कोई भूखा ना सोये,
मग़र देश में ये कोहराम मचाने वाले किसान कौन हैं|

मैं किसान हूँ साहब फसल ना देखूँ तो मुझे कौन देखेगा,
फसल और किसान पर भी ये राजनीति करने वाले कौन हैं|

किया उपद्रव, तिरंगा गिराया, गिराया मेरे देश के सम्मान को,
हमारे नाम पर देश को ये बदनाम करने वाले कौन हैं|

दे सज़ा सरकार इन्हें भी जिन्होंने ये अराजकता फैलाई है,
क्या विचार है सरकार के मन में, क्यूँ ये सरकार मौन है|

– कुमार विनोद