पाबंदी के बावजूद जारी माइनिंग का गोरखधंधा

पाबंदी के बावजूद जारी माइनिंग का गोरखधंधा

 

 

 

 

 

पंजाब में माइनिंग पर अदालत द्वारा रोक लगी हुई है, लेकिन जिला रूपनगर में फिर भी माइनिंग का गोरखधन्धा बाकायदा जारी है। पंजाब सरकार द्वारा 10 जून 2011 को बनाई गई नीति के अनुसार अप्रैल 2012 से पंजाब के अन्दर किसी भी प्रकार की माइनिंग नहीं सकती व पंजाब एण्ड हरियाणा हाई कोर्ट ने भी माइनिंग पर रोक लगा रखी है। बाहरी राज्यों से पंजाब में आने वाले माल की अगर बात करें तो लाए जाने वाले माल पर भारी टैक्स भरना पड़ता है, ताकि पंजाब के माइनिंग ठेकेदारों का धन्धा प्रभावित हो। बावजूद इसके जिला रूपनगर में गांव दसग्राईं के अलावा गांव भलान व कलमां मोड़ के बीच तथा लोहंड में अवैध माइनिंग का गोरख धंधा बेखौफ जारी है। इन क्षेत्रों में शाम होते ही टिप्परों की लंबी कतारें लग जाती हैं, दिन का उजाला होने से पूर्व सभी गाड़ियां रेत व बजरी से भरकर चली जाती हैं। इसके अलावा पंजाब की सीमा के साथ लगते हिमाचल राज्य से भी उक्त गोरख धंधा लगातार जारी है । हिमाचल राज्य के माइनिंग नियमों की अगर बात करें तो बिना क्रश किए कोई भी माल (पत्थर) हिमाचल की सरहद से बाहर नहीं जा सकता। बावजूद इसके सभी नियमों को ताक पर रखते हुए जिला ऊना (हि.प्र.) से पंजाब राज्य में पत्थर की सप्लाई जारी है। उक्त धन्धा कुछ ट्रेडिंग कंपनियों के सहारे चल रहा है, जिनमें से ज्यादातर के पास तो माइनिंग लीज भी नहीं है। ऐसी लीज कंपनियां दूसरे लीज होल्डरों से माल खरीद कर आगे पंजाब में सप्लाई कर रही हैं। हिमाचल राज्य के माइनिंग विभाग के अनुसार हिमाचल से उठाया गया माल केवल हिमाचल में ही सप्लाई किया जा सकता है। उधर जिला प्रशासन रूपनगर द्वारा इस मामले में दोगली नीति अपनाई जा रही है। क्योंकि जिले में किसी भी क्रशर पर अगर थोड़ी सी भी हिलडुल होती है तो पूरा सिस्टम हरकत में आ जाता है। पुलिस भी पूरे दलबल सहित मौके पर पहुंच जाती है। लेकिन पहुंच रखने वालों को कोई भी नही पूछता है। जानकारी के अनुसार हिमाचल से लाया जा रहा पत्थर पंजाब के जीरकपुर व हंडेसरा इलाके में लगे क्रशरों पर कच्चे माल के रूप में सप्लाई किया जा रहा है, जिसके चलते रूपनगर के इमानदार क्रॅशर मालिकों में खासा रोष पाया जा रहा है। हालांकि माइनिंग विभाग तथा पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही का दावा तो करता है, लेकिन उक्त कार्यवाई मात्र औपचारिकता ही है। क्योंकि 10-15 दिनों में मात्र 8 या 10 गाड़ियां ही पकड़ी जाती हैं, जबकि जिला रूपनगर से एक अंदाजे के अनुसार रोजाना 100 से अधिक वाहनों में अवैध रूप से रेत व बजरी की ढुलाई की जा रही है। इस बारे में घनौली बैरियर के ईटीओ सुरिंदर कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा की बैरियर पर हिमाचल राज्य के बिल देखकर ही पर्ची काटी जाती है। इस बारे में रूपनगर व मोहाली के माइनिंग अफसर भोला सिंह बराड़ से बात की गई तो उन्होंने कहा की पंजाब से पत्थर बाहर जाने पर लगी पाबंदी के बारे में उन्हें जानकारी है, लेकिन बाहरी राज्यों से पत्थर आने पर लगी पाबंदी अथवा एंट्री टैक्स की दर बारे उन्हें कोई भी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिले में विभाग पूरी तरह से सतर्क है। इस बारे में जिला ऊना के माइनिंग अफसर परमजीत सिंह से संपर्क किया गया तो उनका फोन बंद मिला। जब माइनिंग अफसर सोलन सुरेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा की बिना क्रश किया कोई भी माल राज्य से बाहर नही जा सकता है, मामले की जांच की जाएगी।