जन का मन है, मीडिया

Photo0025(2)डा. नीरज भारद्वाज ) मीडिया आज के समाज का एक हिस्सा बन चुका है। इसी के चलते आज सूचनाओं की बाढ आ गई है। विचार करें तो आज इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया दोनो की ही पहुंच का बढ़ना लोकतंत्र के लिए अच्छा साबित हो रहा है। लेकिन कहीं न कहीं वह आलोचकों की दृष्टि से प्रश्नवाचक भी साबित भी हो रहा है। किसी भी देश की जनता की आकांक्षाओं और भावनाओं को उस देश की भाषाओं के समाचारपत्रों और समाचार चैनलों के माध्यम से ही सही तरीके से जाहिर किया जा सकता है। इस बात को हम अच्छी तरह समझते हैं और यह काम मीडिया अपने शुरुआती दौर से करता ही चला आ रहा है।

मीडिया समय रहते उन सभी मुद्दों, सवालों और विचारों पर अपनी बहस और कवरेज बढ़ाता रहता है, जो देश के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण हैं। विचार करें तो हम पाते हैं कि मीडिया जनसूचना और जानकारी का ही नहीं, बल्कि जनशिक्षण और जनजागरण का भी महत्वपूर्ण कार्य करता हैं। भारत में समाचारपत्रों की संख्या शुरुआती दौर में कम थी। उसका प्रमुख कारण था देश पर अंग्रेजों शासन का होना। अंग्रेजों के शासन के चलते ही भारतीय समाचारपत्रों पर अंकुश लगाया जा रहा था। लेकिन फिर भी देशभक्त समाचारपत्र निकाल रहे थे और अपने विचारों को लोगों के सामने लाकर देश में आजादी के लिए लोगों के दिलों में लो जलाए हुए थे। समाचारपत्रों के संदर्भ में महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का कहना था कि- ‘‘समाचारपत्र शिक्षा प्रचार का प्रधान साधन है। जिस देश में जितने ही अधिक पत्र हों,  उसको उतनी ही अधिक जागृत अवस्था में समझना चाहिए।‘‘ वास्तव में समाचारपत्र किसी भी देश और समाज का आईना होता है। समाचारपत्र अपने में एक संस्था है, जो देश को बदलने की शक्ति रखता है। यह प्रिंट मीडिया का शक्तिशाली साधन होने के साथ-साथ समाज परिवर्तन का भी साधन है। प्रिंट मीडिया और जैसे-जैसे आविष्कार होने लगे तो इलेक्टॉनिक मीडिया ने भी अपने पंख फैलान शुरु किए। वर्तमान तक आते-आते तो ऐसा लगता है मानों प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों ने ही जैसे दुनिया ही बदले की सोच रखी है और आज हर एक व्यक्ति मीडिया के इन दोनों माध्यमों के अंदर आने वाले हर एक माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से कहीं न कहीं अवश्य ही जुडा है।

आज देश हो या विदेश सभी बातों की जानकारी हर देश के व्यक्ति तक इतनी तेजी से पहुचाई जा रही है जिसकी कल्पना शायद हमने नहीं कि थी। यदि हम भारत की बात करें तो आजादी के बाद देश में परिवर्तन करने में मीडिया की बहुत बडी भूमिका रही है। मीडिया के चलते ही आज कितने ही घोटाले लोगों के सामने आ रहे हैं, वरना कुछ गिने चुने लोग ही आम जनता के पैसे को खा रहे थे और देश को जाने-अजाने कितने पीछे लेकर जा रहे थे। इसकी कल्पना उन्होनें नहीं की और देश कितना पिछडा है इसका अंदाजा भी शायद उन्हें नहीं है। देश में विकास के नाम पर लगने वाला पैसा विदेशी बैंकों में जमा किया जा रहा था। मीडिया के पूर्ण रुप से सक्रिय न होने से पहले, हर एक बात की सच्चाई सामने आने से पहले ही दबा दी जाती थी। लेकिन मीडिया ने हर बात की तह तक जाकर हर व्यक्ति की पूरी खबर ले ली है। आज मीडिया की सक्रियता के चलते धर्म और आस्था के नाम पर ठगने वाले लोगों को भी नहीं छोडा जा रहा है। मीडिया किसी भी पक्ष पर बात करते समय सावधानी बरतता हुआ चलता है और साथ ही समस्या के समाधान के लिए विचारकों की जानकारी भी लोगों के सामने रखने में परहेज नहीं करता।

मीडिया ने साधारण जन को जो आधार दिया है, जिसकी कल्पना लोगों को नहीं थी। कुछ लोग मीडिया पर आपेक्ष भी लगाते हैं। लेकिन सोचा जाए तो मीडिया के कारण ही एक साधारण जन अपनी सोच और विचारों को हवा दे सका है। कितने जन आंदोलन केवल मीडिया के चलते ही सफल हो सकें हैं। हम आशा करते हैं कि मीडिया आने वाले समय में भी ऐसे ही जन के लिए काम करता रहेगा और हर व्यक्ति के मन को अपने से जोडे रखेगा। इसी आशा और विश्वास के साथ आपका मीडिया लेखक।