समाचारों की वेब दुनिया

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(डॉ. नीरज भारद्वाज) आज का समय संचार क्रांति का है। संचार क्रांति की इस प्रक्रिया में जनसंचार माध्यमों के नए-नए रुप हमारे सामने आए हैं। पारंपरिक संचार माध्यमों समाचारपत्र-पत्रिकाओं, रेडियो और टेलीविजन की जगह वेब मीडिया ने ले ली है। जिसके बारे में जानना और समझना आवश्यक हो गया है। आज युग इंटरनेट का है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने आज देश-विदेश में पूरी तरह से अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। लोगों का अधिकतर समय अब इन्हीं साइट्स पर बीतने लगा है। विचार किया जाए तो आज की वैश्विक अवधारणा के अंतर्गत सूचना एक हथियार के रूप में परिवर्तित हो गई है। सूचना जगत गतिमान हो गया है, जिसका व्यापक प्रभाव जनसंचार माध्यमों पर पड़ा है। भारत में तो सूचना का अधिकार नाम से एक नया अधिकार लोगों को दे दिया गया है।

आज इंटरनेट के चलते सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने हजारों लाखों किलोमीटर और देश-दुनिया की दूरियों को तो मानों खत्म ही कर दिया है। फेसबुक, ब्लॉग, ट्विटर, आरकुट, माई स्पेस, गूगल प्लस या लिंक्ड इन जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के चलते विचारों को नई राह मिली है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आज जन आंदोलनों, विद्रोह और परिवर्तन की शुरूआत ही ब्लॉग, ट्विटर, फेसबुक से होती है। समाचार चैनलों पर और पत्र-पत्रिकाओं में ब्लॉग, ट्विटर, फेसबुक पर लिखने वाले लोगों के विचार भी आने और छपने लगे हैं। विचार किया जाए तो वेब पत्रकारिता आज समाचारपत्र-पत्रिका का एक बेहतर विकल्प बन चुका है। लोगों में अपनी नई पहचान बना चुका है। इसे न्यू मीडिया, आनलाइन मीडिया, साइबर जर्नलिज्म और वेब जर्नलिज्म जैसे कई नामों से जाना जाता है। वास्तव में  इसके द्वारा सिर्फ एक क्लिक से किसी भी खबर या सूचना को आसानी से पढ़ा जा सकता है। यह सुविधा 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध होती है, जिसके लिए किसी प्रकार का मूल्य नहीं चुकाना पड़ता। सिर्फ आपके पास इंटरनेट की सुविधा होनी चाहिए।

आज भारत के महानगरीय जीवन में इंटरनेट की पहुंच घर-घर तक या ये भी कह सकते हैं कि हर एक व्यक्ति और उसके मोबाइल पर हो गई है। युवाओं पर इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है। अब युवा वर्ग हर एक बात की जानकारी अपने मोबाइल पर ही जान लेना चाहता है। अब वह परिवार के साथ बैठकर हिंदी समाचार चैनलों को देखने की बजाए इंटरनेट पर वेब पोर्टल से सूचना या आनलाइन समाचार देखना पसंद करते हैं। समाचार चैनलों पर किसी सूचना या खबर के निकल जाने पर उसके दोबारा आने की कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन वहीं वेब पत्रकारिता के आने से ऐसी कोई समस्या नहीं रह गई है। जब चाहे किसी भी समाचार चैनल की वेबसाइट या वेब पत्र-पत्रिका को खोलकर पढ़ा जा सकता है। इतना ही नहीं आज लगभग सभी समाचार चैनल, पत्र-पत्रिकाएं फेसबुक आदि से भी सीधे तौर पर लोगों से जुडे हैं, जो लोगों को हर क्षण आने वाली नई जानकारी दे रहे हैं। लगभग सभी बड़े-छोटे समाचार पत्रों ने अपने ई-पेपर यानी इंटरनेट संस्करण निकाले हुए हैं।

वेब मीडिया न केवल पत्रकारिता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि इससे कितने लोगों को रोजगार मिल रहा है। सही मायनों में यह रोजगार के लिए अधिक लाभदायक सिद्ध हुआ है। वेब मीडिया के विस्तार ने वेब डेवलपरों एवं वेब पत्रकारों की मांग को बढ़ा दिया है। यह विचार करने की बात है कि वेब पत्रकारिता किसी समाचारपत्र-पत्रिका को प्रकाशित करने और किसी चैनल को प्रसारित करने से अधिक सस्ता माध्यम है। इसके चलते ही चैनल अपनी वेबसाइट बनाकर उन पर बर्किंग न्यूज, स्टोरी, आर्टिकल, रिपोर्ट, वीडियो या साक्षात्कार को अपलोड और अपडेट करते रहते हैं। जिससे लोगों को नई-नई जानकारी के साथ-साथ नए-नए प्रयोगों को जानने और समझने का मौका भी मिलता है। इन्ही सभी प्रयासों के चलते आज विज्ञापन हमारे पीसी और मोबाइल पर तेजी से अपना नया रास्ता बना रहे हैं। आज यह नया मीडिया नई सोच के साथ हमारे सामने उभर कर आ रहा है। भविष्य में यह नया क्या करने जा रहा इसकी केवल कल्पना की जा सकती है। वो नया अभी देखना बाकि है।