हॅंसना जरुरी है।

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(डॉ. नीरज भारद्वाज) टेलीविजन  पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम धीरे-धीरे अपना दायरा बढाने में सफल होते नजर आ रहे हैं। जिस दौर में भारतीय टेलीविजन ने शुरुआत की थी उस समय उसके पास सिर्फ एक ही चैनल था और वह था दूरदर्शन जिसे डीडी-1 के नाम से जाना जाता रहा है। फिर डीडी-2 और उसके बाद निजी चैनलों का दौर आ गया। धीरे-धीरे तकनीक बढी और टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की संख्या में भी बढोत्तरी होनी शुरु हो गई।

टेलीविजन पर पहले सामाजिक कार्यक्रमों से शुरुआत हुई। फिर मनोरंजन के सभी प्रकार के कार्यक्रम टीवी चैनलों पर दिखाई देने लगे। आज टेलीविजन पर लगभग हर एक सोच से जुडे व्यक्ति के मतलब के कार्यक्रम आते हैं। टीवी ने महिला, पुरुष, बच्चा, युवा सभी को सभी के आयु और वर्ग के कार्यक्रम दिये हैं। अब कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता की टीवी पर ऐसा कार्यक्रम नहीं आता, बल्कि कई बार तो हमारी सोच से परे हट कर ऐसा कार्यक्रम हमारे सामने आ जाता है, जिस की कल्पना करना भी संभव नहीं था। लोगों को खाना बनाना, घुमने फिरने के स्थान बताना, बच्चों को पढना, कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर इनाम जितना, हंसी-मजाक, देश-विदेश की सारी जानकारी आदि आज टीवी कार्यक्रमों के माध्यम से ली जा सकती है या ये कहें कि वे यह सभी जानकारी दे रहे हैं।

आज के भागते दौडते समय में लोगों के पास समय की कमी है और ऐसे में यदि कोई आपसे हंसी मजाक की बातें करता है तो यह समझों कि वह हमारे लिए वरदान बन जाती है। टीवी पर हंसी मजाक के कार्यक्रमों का आना लगा ही रहता है। देख भाई देख धारावाहिक में शेखर सुमन और उस कार्यक्रम में दिखाए गए  परिवार ने टीवी की दुनिया में हंसी मजाक का जो उदाहरण रखा। वह अपने में एक यादगार पल रहे होंगे। जसपाल भट्टी द्वारा बनाए गए हंसी मजाक के कितने ही कार्यक्रम टीवी पर लोकप्रिय हुए। समय बदला और फिर हंसी को लेकर रिएयल्टी-शो सामने आए। विचार किया जाए तो हंसी मजाक का दौर टीवी पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा है। अब पिछले कुछ दिनों से क्लर्स चैनल पर कपिल की कॉमेडी ने सभी कार्यक्रमों को पछाड दिया है। कपिल के द्वारा कहे जाने वाला शब्द बाबा जी का ठल्लू अपने आप में एक अलग ही उदाहरण है। कपिल अपने आप में एक ऐसा उदाहरण बन गया है कि टेलीविजन पर हंसी कि दुनिया की चर्चा हो और उसका नाम न आए तो गलत होगा।

वास्तव में हंसी हमारे जीवन में बडा महत्व रखती है और जो व्यक्ति चाहे कैसे भी करके हमे तो पल की खुशी देता है तो वह हमारे लिए उस समय भगवान ही होता है, क्योंकि गम देने के लिए यह समाज कम नहीं है। रोज सुबह उठते ही नई समस्या जन्म ले लेती है, मंहगाई की मार, बेरोजगारी की लंबी लाईन, राशन दफ्तर में लाईन आदि कितने ही पल हमारी खुशी को खा जाते हैं। इसीलिए हंसते- हंसते यदि यह जीवन कट जाता है तो इससे अच्छी बात क्या होगी। आप सभी टीवी पर हंसाने वाले नायक-नायिकाओं का बहुत-बहुत धन्यवाद, जो आप सभी इस समाज को दे रहे हो, वह वास्तव में ही समाज का एक बहुत बडा कार्य है। साधु संत यदि धर्मग्रंथों की बात करते हैं तो आप उनसे कम नहीं हो, क्योंकि समाज के बहुत से पहलु होते हैं। जिसका ख्याल रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।


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